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Medical Confrence : लिवर डोनेट करने के बाद खिलाड़ी भी तीन महीने के भीतर मैदान में कर सकता है वापसी

Sat, 11 Oct 2025 05:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

एक 22 वर्षीय महिला फुटबॉल खिलाड़ी ने पिछले साल अपने छोटे भाई को लिवर डोनेट किया। जिसके तीन महीने बाद डोनर महिला ने फिर से मैदान में वापसी की और सामान्य दिनों की तरह फुटबॉल खेलने लगी।
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डॉ. वलीउल्लाह। - फोटो : अमर उजाला।
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एक 22 वर्षीय महिला फुटबॉल खिलाड़ी ने पिछले साल अपने छोटे भाई को लिवर डोनेट किया। जिसके तीन महीने बाद डोनर महिला ने फिर से मैदान में वापसी की और सामान्य दिनों की तरह फुटबॉल खेलने लगी। इसे लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट कहते है। इसमें 18 से 50 वर्ष तक का व्यक्ति अपने परिजन व सगे संबंधी को जीवित रहते लिवर डोनेट कर सकता है।

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इसमें एक सप्ताह बाद डोनर को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। यह जानकारी शनिवार को मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर प्रीतम दास सभागार में एल्युमिनाई वेलफेयर एसोसिएशन और सर्जरी विभाग की तरफ से एल्युमिनाई सीएमई एवं प्रेस्टेजिएश ओरेशन 2025 में लखनऊ के लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. वलीउल्ला सिद्दीकी ने दी।

इस दौरान देश-विदेश से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मल्टी ट्रांसप्लांट पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में नेत्र चिकित्सक एवं पूर्व प्राचार्य प्रो. (डॉ.) एसपी सिंह, प्रो. डीबी चंद्रा की स्मृति में मोतियाबिंद सर्जरी में सटीकता, पूर्वानुमान और पूर्णता विषय पर, प्रो. एसआर सिंह की स्मृति में मुंबई के वरिष्ठ सर्जन डॉ. कुशल मित्तल ने खुद को डिकोड करना विषय पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उप प्रधानाचार्य डॉ. मोहित जैन, डॉ. संतोष सिंह, डॉ. डॉ. वैभव श्रीवास्तव, डॉ. राजुल अभिषेक सहित अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।

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उत्तर भारत में लाइव डोनेश के प्रति जागरूकता जरुरी

प्रो. प्रीतम दास की स्मृति में मल्टी ट्रांसप्लांट पर जानकारी देते हुए अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग में ट्रांसप्लांट सर्जरी के प्रमुख विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) अजय खन्ना ने कहा कि शुगर व बीपी जैसे कुछ बीमारियों के लम्बे समय तक रहने पर किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से लिवर व हार्ट के भी ट्रांसप्लांट की नौबत हा सकती है। ऐसे में बीमारी का समय रहते सामने आना जरूरी है। इसके अलावा मल्टी ट्रांसप्लांट के संबंध में चिकित्सक को प्रशिक्षित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में लोगों को लाइन डोनेश के प्रति जागरूक होना चाहिए।

जांच लिखने से पहले मरीज का नाड़ी परीक्षण जरूरी

प्रो. आरके अग्रवाल की स्मृति में व्याख्यान देते हुए सर्जन एसोसिएशन के अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रभारी एवं पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष (डॉ.) प्रोबाल नियोगी ने कहा कि युवा चिकित्सकों को चाहिए कि वह मरीज को तमाम प्रकार की जांच लिखने से पहले उसका ठीक ढंग से परीक्षण कर लें। जैसे पहले चिकित्सक मरीज की नाड़ी और सीना, आंख, जीभ का परीक्षण करते थे। वहीं आवश्यकता पड़ने पर ही जांच लिखी जाती थी। इस प्रकार की चिकित्सकीय पद्धति अपनाने से मरीज का उपचार बेहतर दिशा में होता है।

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