इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा की वैधानिक नियमों के तहत गठित मेडिकल बोर्ड के निष्कर्षों में दखल देने का अदालत का अधिकार बेहद सीमित है। सामान्य रूप से अदालतों को मेडिकल बोर्ड के निष्कर्षों में दखल नहीं देना चाहिए, जब तक कि इसमें स्पष्ट रूप से विरोधाभास या अवैधानिकता नजर ना आती हो। कानपुर देहात के विवेक कुमार की अपील को खारिज करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति विश्वनाथ सोमद्दर और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने दिया है।
याची कांस्टेबल भर्ती में शामिल हुआ था, जिसमें मेडिकल बोर्ड की जांच में उसके बाएं कान में खराबी पाई गई। इसके चलते उसे अनफिट कर दिया गया। उसने स्वयं से अपना मेडिकल कराया और उस रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पुलिस भर्ती बोर्ड के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को चुनौती दी। एकल न्याय पीठ ने दोनों मेडिकल बोर्डों की रिपोर्ट में कोई विशेष अंतर ना पाते हुए याचिका खारिज कर दी।
इस आदेश को विशेष अपील में चुनौती दी गई थी। अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि याची द्वारा प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्ट, वैधानिक प्रक्रिया के तहत गठित मेडिकल बोर्ड पर प्रभावी नहीं हो सकती और उसे शून्य नहीं कर सकती याची द्वारा प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्ट में भी उसके कान में खराबी पाई गई है। वह साबित करने में असफल रहा कि पुलिस मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट संदेहास्पद है। इन स्थितियों में वैधानिक नियमों के तहत गठित मेडिकल बोर्ड के निष्कर्ष में दखल देना संभव नहीं है। कोर्ट ने विशेष अपील खारिज कर दी।