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जेके इंस्टीट्यूट में नहीं चलेगा एमसीए का पाठ्यक्रम

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MCA course out of JK Institute - फोटो : CITY DESK
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प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के जेके इंस्टीट्यूट में नए सत्र से एमसीए पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं लिए जाएंगे। इंस्टीट्यूट में इस पाठ्यक्रम को समाप्त कर दिया गया है, जबकि इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज (आईपीएस) में एमसीए के पाठ्यक्रम का संचालन पूर्व की भांति जारी रहेगा। यह निर्णय बृहस्पतिवार को इविवि की एकेडमिक कौंसिल की बैठक में लिया गया। हालांकि, कौंसिल के इस निर्णय का विरोध शुरू हो गया है, क्योंकि जेके इंस्टीट्यूट में एमसीए की फीस आईपीएस के मुकाबले काफी कम है।
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आईपीएस में एमसीए पाठ्यक्रम का संचालन वर्ष 2007 से शुरू किया गया था, जबकि जेके इंस्टीट्यूट में यह पाठ्यक्रम वर्ष 2018 से शुरू हुआ। एकेडमिक कौंसिल के निर्णय के अनुसार जो छात्र पहले से पढ़ रहे हैं, वे जेके इंस्टीट्यूट से ही एमसीए का पाठ्यक्रम पूरा करेंगे, लेकिन नए सत्र से वहां एमसीए में प्रवेश नहीं लिए जाएंगे। इविवि के पीआरओ डॉ. शैलेंद्र मिश्र का कहना है कि जेके इंस्टीट्यूट के बोर्ड ऑफ स्टडीज की ओर से एमसीए का पाठ्यक्रम समाप्त करने का प्रस्ताव भेजा गया था, जिस पर फैकल्टी बोर्ड ने भी अपनी मुहर लगा दी थी और अब एकेडमिक कौंसिल से भी प्रस्ताव को पारित कर दिया गया। बोर्ड ऑफ स्टडीज ने एकेडमिक स्टाफ की कमी एवं अन्य कारणों से इस पाठ्यक्रम को समाप्त करने का प्रस्ताव भेजा था। पीआरओ के अनुसार आईपीएस में एमसीए पाठ्यक्रम का संचालन पूर्व की भांति जारी रहेगा।
उधर, एकेडमिक कौंसिल के इस निर्णय का विरोध शुरू हो गया है। तमाम छात्रों का कहना है कि आईपीएस द्वारा संचालित एमसीए के संपूर्ण पाठ्यक्रम का शुल्क 178271 रुपये है, जबकि जेके इंस्टीट्यूट में केवल 59271 रुपये शुल्क लिया जाता है। छात्रों का कहना है कि इविवि प्रशासन का यह निर्णय शिक्षा के बाजारीकरण को बढ़ावा देने वाला है। इससे आर्थिक रूप कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए एमसीए की पढ़ाई मुश्किल हो जाएगी। छात्रों की मांग है कि जेके इंस्टीट्यूट में भी एमसीए पाठ्यक्रम को पूर्व की भांति संचालित किया जाए।
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ईसीसी मामले में कमेटी करेगी समीक्षा
एकेडमिक कौंसिल की बैठक में ईसीसी को इविवि की डिग्री दिए जाने का मुद्दा भी उठा। कुछ दिनों पहले ही परीक्षा समिति की बैठक में तय हुआ था कि इविवि की ओर से ईसीसी को डिग्री नहीं दी जाएगी। एकेडमिक कौंसिल की बैठक में जैसे ही मुद्दा उठा तो पूर्व एवं वर्तमान परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि ईसीसी अपनी परीक्षाएं अलग कराता है। वह इविवि के मानकों को अनुपालन भी नहीं करता है। ऐसे में इविवि की ओर से उसे डिग्री क्यों दी जाए। इस पर सहमति न बन पाने के कारण तय हुआ कि इसके लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा, जो यूजीसी रेगुलेशन और इविवि के ऑर्डिनेंस को ध्यान में रखकर इसकी समीक्षा करेगी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डिग्री दिए जाने के मुद्दे पर निर्णय लिया जाएगा।
बदलेगा पीएचडी डिग्री का प्रारूप
एकेडमिक कौंसिल की बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि विज्ञान के शोधार्थियों को जो डिग्री दी जाती है, उसमें ‘पीएचडी इन साइंस’ लिखा रहता है। छात्र जब नौकरी के लिए आवेदन करते हैं या विदेश जाते हैं तो दिक्कत आती है। छात्रों ने मांग की है कि डिग्री पर विषय और थीसिस का टॉपिक भी लिखा जाए। परीक्षा नियंत्रक प्रो. रामेंद्र सिंह ने बताया कि छात्रों की इस समस्या का ध्यान में रखकर पीएचडी डिग्री का नया प्रारूप तैयार किया जा रहा है। जल्द ही विभागाध्यक्षों के पास प्रारूप भेजा जाएगा और विभागाध्यक्षों से मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा।
कुलपति को निर्देश, सिर्फ दैनिक कार्य करें
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरआर तिवारी के पास केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से पत्र भेजा गया है कि प्रो. तिवारी बतौर कुलपति केवल दैनिक कार्यों का ही संपादन करें। इस बारे में पीआरओ डॉ. शैलेंद्र मिश्र का कहना है कि इस पत्र के बारे में जानकारी नहीं है। अगर ऐसा कोई पत्र जारी हुआ भी है तो कार्यवाहक कुलपति प्रो. आरआर तिवारी वही कार्य कर रहे हैं, जो इविवि के ऑर्डिनेंस में कार्यवाहक कुलपति के लिए निर्धारित है। उन्होंने अब तक ऐसा कोई नीतिगत निर्णय नहीं लिया है, जिस कोई आपत्ति की जा सके।
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