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सपा की आबरू बचाने को आगे आई हैं मायावती : सिद्धार्थनाथ

Tue, 06 Mar 2018 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में बसपा द्वारा सपा को समर्थन दिए जाने के एलान के बाद योगी सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने सोमवार को बसपा सुप्रीमो मायावती पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 25 वर्ष पहले मायावती ने अपनी आबरू का हवाला देकर समाजवादी पार्टी से गठबंधन तोड़ दिया था वह आज उन्हीं लोगों की आबरू बचाने को निकली है। मायावती अपने भाई को राज्यसभा भेजने की फिराक में है। वह भाई के प्यार में दलित वोटों का सौदा कर रही हैं। सिद्धार्थनाथ ने कहा कि मायावती स्पष्ट करें कि जो खतरा 25 वर्ष पहले उन्हें मुलायम सिंह यादव से था,  क्या वह उनके बेटे अखिलेश यादव से नहीं है।
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फूलपुर उपचुनाव के लिए सिविल लाइंस में वात्सल्य सभागार में बनाए गए मीडिया सेंटर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए सिद्धार्थनाथ ने कहा सपा को बैशाखी की जरूरत एक बार फिर से पड़ी है। पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस का सहारा लिया था। अंजाम सभी जानते हैं। इस बार बसपा बबुआ ने बुआ का सहारा लिया है। इस बार भी पिछले वर्ष की पुनरावृत्ति होनी तय है। भाजपा को सपा-बसपा गठबंधन से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। सिद्धार्थनाथ ने अतीक अहमद का नाम लिए बगैर इशारे ही इशारे में कहा कि कहा कि उपचुनाव में भाजपा की लड़ाई माफिया डॉन से है। सपा और कांग्रेस मेें तीसरे नंबर पर आने की होड़ मची हुई है। इस दौरान मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी, भाजपा विधायक भूपेश  चौबे,  अवधेश सिंह, नगर अध्यक्ष अवधेश चंद्र गुप्ता, प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ला, पवन श्रीवास्तव, दिनेश तिवारी आदि मौजूद रहे।

पिछले वर्ष हुए निकाय चुनाव में  टिकट वितरण से खफा होकर भाजपा छोड़ कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले अखिलेश सिंह ओर मिथिलेश सिंह ने सोमवार का एक बार फिर से पार्टी ज्वाइन कर ली। वार्ड नंबर 44 और 45 के इन दोनों पार्षदों ने योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह और इलाहाबाद की मेयर अभिलाषा गुप्ता  नंदी के समक्ष पार्टी की सदस्यता ली। दोनों ही पार्षद आपस में सगे भाई भी है। इस दौरान भाजपा नेता धनंजय सिंह, डा. नीरज अग्रवाल आदि मौजूद रहे। दरअसल निकाय चुनाव के दौरान दोनों भाईयों ने टिकट मांगी थी, लेकिन भाजपा ने अखिलेश सिंह को ही उम्मीदवार बनाया था। भाई को टिकट न मिलने से नाराज अखिलेश सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन कर चुनाव लड़ा। उनके भाई मिथिलेश ने भी निर्दलीय  प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। दोनों ही भाई चुनाव जीते भी। सोमवार को दोनों ही एक बार फिर से भाजपा में शामिल हो गए।
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