इलाहाबाद। साढ़े सात साल बाद शेयर बाजार मुंह के बल गिरा तो लगा कि आर्थिक क्षेत्र में फिर कोई बड़ा तूफान आने वाला है। लोगों को 2008 की मंदी का दौर याद आ गया लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं होने वाला। वैसे भी 2008 की मंदी आईटी एवं बीमा क्षेत्र के लिए थी और इसका सबसे ज्यादा प्रभाव विदेशी कंपनियों और वहां तैनात कर्मचारियों पर दिखा था।
इन साढ़े सात वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था में जबर्दस्त सुधार आया। तमाम नए उद्योगों की स्थापना हुई और रोजगार के अवसर भी बढ़े। नतीजा कि एक ही दिन में शेयर बाजार उठकर खड़ा हो गया। मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी में उछाल आया तो रुपया भी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। जानकार भी शेयर बाजार में आई गिरावट को तात्कालिक मान रहे हैं। ऐसे में अगर किसी को मंदी की चिंता सता रही है तो उसे भूल जाएं। परेशान होने की जरूरत नहीं है।
सोमवार को शेयर बाजार धड़ाम हुआ तो निवेशकों के चेहरे उतर गए लेकिन 24 घंटे बाद ही चेहरे पर रौनक वापस आ गई। मंगलवार को सेंसेक्स 290.82 अंक चढ़कर 26032.38 और निफ्टी 71.70 अंक चढ़कर 7886.70 नी बंद हुआ। सोने के भाव में 702 रुपये की गिरावट आई और डॉलर के मुकाबले रुपये में आई 56 पैसे की मजबूती ने भी बाजार में जान फूंक दी। उधर, चीन में मंदी की आहट को दरकिनार करते हुए सरकार ने भी भरोसा दिलाया है कि देश में ऐसी स्थिति नहीं है। शेयर बाजार के जानकारों का भी मानना है कि फिल्हाल 2008 जैसे हालात नहीं आने वाले।
जहां तक 2008 की मंदी की बात है तो आईटी, बीमा और रियल स्टेट इंडस्ट्री पर ही इसका ज्यादा असर पड़ा था। देश में बीमा और आईटी क्षेत्र की विदेशी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों का इंक्रीमेंट रोक दिया था तो बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी भी हुई थी। अचानक बेरोजगारी से देश में हाहाकार जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी। सोमवार को शेयर बाजार में जिस तरह से गिरावट आई, उसने पुरानी याद ताजा कर दी।
हालांकि 24 घंटे बाद ही स्थिति सामान्य हो गई। मंगलवार को सेंसेक्स शुरूआती गिरावट के बाद संभाला और डॉलर के मुकाबले रुपया भी मजबूत हुआ तो निवेशकों को कुछ राहत मिली। आर्थिक क्षेत्र के विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगस्त के अंत या सितंबर के पहले सप्ताह तक सेंसेक्स 27000 के आंकड़े को पार कर जाएगा।
‘भारतीयों में बचत करने की प्रवृत्ति और फजूलखर्ची न करने की वजह से ही शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के बावजूद स्थिति संभली हुई है। इसके मंदी की स्थिति बनने की संभावना इसलिए भी कम है, क्योंकि शेयर बाजार में गिरावट का कारण चीन में करेंसी का अवमूल्यन एवं कच्चे तेल की कीमत में गिरावट है, जो अगले कुछ समय में सुधर जाएगा।’ विवेक जायसवाल वित्त विशेषज्ञ
‘देश में अभी वर्ष 2008 जैसी मंदी की स्थिति नहीं है लेकिन बाजार का जो हाल है, उससे सबसे ज्यादा रियल स्टेट इंडस्ट्री प्रभावित होगी, क्योंकि रियल स्टेट कंपनियों का शेयर मार्केट में काफी अधिक निवेश होता है। हालांकि रियल स्टेट कारोबार पहले से ही मंदी के दौर में है। रियल स्टेट इंडस्ट्री ज्यादा समय के लिए निवेश भी नहीं करतीं, जिससे उनका कारोबार और अधिक प्रभावित हो सकता है।’ जीशान अख्तर- रियल स्टेट कंसलटेंट
‘कई सेक्टर ऐसे हैं जो शेयर मार्केट में लंबे समय के लिए निवेश करते हैं। बाजार में आई गिरावट का असर उन पर इसलिए खास नहीं होगा, क्योंकि सेंसेक्स में जल्द सुधार संभव है। तीन वर्ष या उससे अधिक समय के लिए निवेश करने वालों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।’ प्रेम प्रकाश राय-निवेश सलाहकार