कुलपति के खिलाफ इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) परिसर का माहौल तेजी से गर्माता जा रहा है। कुलपति के खिलाफ समाजवादी छात्रसभा, एबीवीपी समेत कई छात्र संगठन एक मंच पर आ गए और बृहस्पतिवार को सभी ने संयुक्त रूप से कुलपति के खिलाफ परिसर में मार्च निकाला। इस दौरान धरना-प्रदर्शन और सभा भी हुआ। छात्राएं भी आंदोलन में शामिल हो गई हैं और उन्हें कुलपति के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं। लाइब्रेरी के सामने मेन गेट पर हुई बैठक में आंदोलन की अगली रणनीति तैयार की गई।
छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष अवनीश यादव, निवर्तमान महामंत्री निर्भय द्विवेदी, पूर्व छात्रसंघ रोहित मिश्र, ऋचा सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, छात्र नेता आनंद सिंह निक्कू, रजनीश सिंह रिशू, सूर्य प्रकाश मिश्र, प्रियंका सिंह समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय कैंपस में कुलपति के खिलाफ मार्च निकाला। आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्राएं भी शामिल हुईं और उन्होंनें कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कहा कि व्हाट्स एप चैट और कॉल रिकार्डिंग का ऑडियो वायरल होने के बाद जिस तरह से कुलपति विवादों में घिरे, इसके बाद उन्हें विश्वविद्यालय का कुलपति होने कोई अधिकार नहीं रह गया है। बेहतर है कि वह खुद ही इस्तीफा देकर यहां से चले जाएं।
मार्च निकालने के बाद छात्र-छात्राओं ने परिसर में धरना-प्रदर्शन किया और आंदोलन की अगली रणनीति तैयार की। तय हुआ कि शुक्रवार को हॉस्टलों, डेलीगेसियों में जाकर छात्र आंदोलन के लिए समर्थन मांगा जाएगा। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों से भी अपील की जाएगी कि कुलपति के खिलाफ इस आंदोलन में छात्र-छात्राओं के साथ खड़े हों। इसके अलावा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जिला अधिवक्ता संघ के साथ सरकारी कार्यालयों के कर्मचारी संगठनों से भी समर्थन मांग जाएगा। उधर, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को पत्र लिखकर उन्हें विश्वविद्यालय के हालात से अवगत कराया है और मांग की है कि ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ की बात करने वाली सरकार इविवि में बीएचयू जैसी स्थिति उत्पन्न होने से पहले कुलपति पर कार्रवाई करे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय का 23 सितंबर को स्थापना दिवस है। इस मौके पर 23 को सुबह 11 बजे सीनेट हॉल में स्थापना दिवस समारोह का कार्यक्रम प्रस्तावित है। कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोल चुके छात्र-छात्राओं ने चेतावनी दी है कि वे कुलपति को कार्यक्रम में शामिल नहीं होने देंगे। पूर्व अध्यक्ष रोहित मिश्र का कहना है कि छात्र कार्यक्रम को लेकर कोई विरोध नहीं करेंगे, क्योंकि यह इविवि की स्थापना दिवस का कार्यक्रम है लेकिन कुलपति को परिसर में नहीं आने देंगे। वहीं, पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह और निर्वमान अध्यक्ष अवनीश यादव का भी कहना है कि किसी भी सूरत में कुलपति को कार्यक्रम में शामिल नहीं होने देंगे। वैसे उन्हें खुद भी इस कार्यक्रम में नहीं आना चाहिए। बाकी कोई भी आए, छात्र किसी का विरोध नहीं करेंगे। इविवि के चीफ प्रॉक्टर प्रो. एचएस उपाध्याय का कहना है कि परिसर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्होंने डीएम और एसएसपी को पत्र लिख दिया है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के खिलाफ कई संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। भारत की जनवादी नौजवान सभा, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन के सदस्यों बैठक कर कहा है कि विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्षों के नेतृत्व चल रहे धरने पर अराजकतत्वों का हमला स्पष्ट तौर पर प्रशासन की मिलीभगत दर्शाता है। गंभीर आरोपों से घिरे कुलपति का पद पर बने रहना चिंता का विषय है। बैठक में गायत्री गांगुली, सीटू के सुब्रत बैनर्जी, डीवाईएफआई के मो. रिज़वान ने कुलपति के इस्तीफे एवं उनके खिलाफ जांच की माँग की।
वहीं, स्टूडेंड फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी इविवि में बढ़ती अराजकता की घटनाओं पर चिंता जताई है। संगठन के शिवम मौर्य का कहना है कि परिसर में छेड़खानी की घटनाएं होती रहती हैं लेकिन अराजकतत्वों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। कुलपति भी गंभीर आरोपों से घिरे हैं। ऐसे में नैतिकता के आधार पर उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। संगठन के सदस्यों ने पूर्व अध्यक्ष पर हुए हमले की निंदा की। उधर, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने इविवि में लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। पुलिस चौकी से कुछ दूरी पर छात्रों पर यह हमला प्रशासन की मिलीभगत को स्पष्ट से दर्शाता है। पार्टी के राज्य सचिव मंडल के सदस्य रविशंकर मिश्र ने कुलपति पर लगे आरोपों की जांच और प्रशासनिक अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की वूमेंस एडवाइजरी बोर्ड (वैब) की पूर्व सदस्य डॉ. लालसा यादव ने पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह की ओर से जारी उस पत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं, जिसमें एक महिला ने कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. लालसा यादव का कहना है कि वह पूर्व में वैब की सदस्य रहीं हैं। दावा किया जा रहा है कि यह पत्र वर्ष 2016 में आया था। डॉ. लालसा के अनुसार मई 2016 में संभवत: वैब का अस्तित्व खत्म हो गया था और इसकी जगह सीकैश नाम की नई समिति ने ले ली थी। डॉ. लालसा का कहना है कि वह वैब की जितनी बैठकों में शामिल हुईं, किसी में भी इस पत्र को लेकर कोई चर्चा नहीं हुआ। वैब की तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. रंजना कक्कड़, सचिव प्रो. निशा श्रीवास्तव या किसी अन्य पदाधिकारी अथवा सदस्य ने इस तरह के किसी पत्र का उल्लेख नहीं किया। ऐसे में प्रथम दृष्टया यह पत्र फर्जी एवं संदिग्ध है। इसकी गंभीरता से जांच कराई जानी चाहिए।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कुलपति के खिलाफ धरना प्रदर्शन के दौरान पूर्व छात्रसंघ अध्यक्षों पर हमले के आरोपी छात्र शिवम सिंह को नोटिस जारी किया गया है। चीफ प्रॉक्टर प्रो. एचएस उपाध्याय ने बताया कि शिवम को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। वहीं, अध्यापक संघ ने भी पूर्व अध्यक्षों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने ऑटा-ऑक्टा की संयुक्त बैठक के दौरान अराजकता की। इस मामले में पूर्व अध्यक्षों में जो भी विश्वविद्यालय में किसी पाठ्यक्रम में नामांकित हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया है।