prayagraj news : बाई का बाग स्थित ग्वालियर कोठी में बना बेणीमाधव मंदिर। इसका निर्माण बैजा बाई ने कराया था।
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कहा, वाराणसी में घाट और मंदिर निर्माण के दौरान वह इलाहाबाद में कई वर्षों तक रहीं। इस दौरान पेठा वाली सड़क के सामने उन्होंने बाग के साथ ही सामने की ओर कई कोठरियां और वेणीमाधव मंदिर भी बनवाया। बहुत कम लोगों को पता होगा कि बैजा बाई के यहां ठहरने और बाग बनवाने के कारण ही बाद में इस क्षेत्र को ‘बाई का बाग’ के नाम से जाना जाने लगा।
नागर स्थापत्य कला की छाप वाले वेणीमाधव मंदिर के गर्भगृह में श्री वेणी माधव और गरुण की मूर्तियां हैं और इनके पास ही बैजा बाई साहेब की भी संगमरमर की मूर्ति है। मंदिर के शिखर पर सिंधिया राजवंश का प्रतीक ‘दो नागों से घिरी भव्यता के बीच सूर्य की आकृति’ भी उकेरी गई है। पथरचट्टी रामलीला कमेटी के प्रवक्ता लल्लू लाल गुप्त ‘सौरभ’ कहते हैं, दशहरा के दिन दशानन वध की लीला के बाद ‘भगवान राम’ इसी वेणीमाधव मंदिर में पूजन-अर्चन के लिए आते हैं। फिर यहीं से पथरचट्टी के रामदल का आरंभ होता है। यह परंपरा दशकों से चली आ रही है।
prayagraj news : बाई का बाग स्थित बैजा बाई के द्वारा बनवाया गया ग्वालियर कोठी।
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वेणीमाधव मंदिर के निकट रहने वाले शांताराम दामले ने जोड़ा, आजादी के पहले परिसर में बतौर किराएदार रहने आए मेरे पिता डीएन दामले बताते थे, कभी इस क्षेत्र में जंगल ही जंगल था। बाई जी के बाग के भीतर आम और अमरूद के पौधे लगे थे, जिनकी आय से मंदिर की देखरेख होती थी। बाद में जब बाग के करीब की जमीन पर अतिक्रमण होने लगा तो राजमाता सिंधिया ने मंदिर परिसर को छोड़कर बाकी जमीन बेच दी। फिलहाल मंदिर का प्रबंधन सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट, ग्वालियर के पास है। मंदिर के रखरखाव के लिए ग्वालियर स्टेट से ही रकम आती है। 000000