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कई पानी की टंकियां बनीं शोपीस

Sat, 09 May 2015 02:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। शहर में जवाहर लाल नेहरू अरबन रिन्यूवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर पेयजल योजना दुरुस्त की गई। इसके लिए बड़ी संख्या में नए ट्यूबवेल लगाए और पुराने रीबोर किए गए। बड़े-बड़े ओवरहेड टैंक के साथ भूमिगत जलाशय भी बनाए गए लेकिन ज्यादातर ओवरहेड टैंक शोपीस बनकर ही रह गए हैं। शहर पश्चिमी से लेकर उत्तरी तक कई ओवरहेड टैंक में रोज पानी ही नहीं भर पाता। इसकी वजह से क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित होती है। हालांकि अफसर दावा कर रहे हैं कि सभी टंकियों में पानी भर रहा है लेकिन क्षेत्रीय पार्षद और स्थानीय लोगों की बातों पर विश्वास करें तो अफसरों के दावों की हवा निकल जाती है।
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जेएनएनयूआरएम के तहत शहर में बेहतर पेयजल व्यवस्था के लिए शहर उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी में 38 बड़े ट्यूबवेल लगे। पानी छोड़ चुके 18 पुराने ट्यूबवेलों को रीबोर कराया गया। योजना के तहत करेली, अल्लापुर, चकिया, कटरा, तेलियरगंज, अशोक नगर, मम्फोर्डगंज सहित अन्य इलाकों में 33 टंकियां बनवाई गईं, ताकि लोगों को ट्यूबवेल के बजाए टंकियों से जलापूर्ति की जा सके और गर्मी में पानी की समस्या भी न झेलनी पड़े। कहा गया कि इससे पानी की बर्बादी भी काफी हद तक रुकेगी लेकिन कई इलाकों में टंकियां शोपीस बन गई हैं।

अल्लापुर हैजा अस्तपाल स्थित टंकी नियमित रूप से नहीं चलती। निर्माण के करीब वर्ष भर तो टंकी में पानी नहीं भरा गया। पता चला कि जिन ट्यूबवेलों से टंकी में पानी चढ़ाया जाना है, वह पूरी क्षमता से नहीं चल रहे। बाद में दो और ट्यूबवेलों से कनेक्शन कर टंकी में पानी भरा गया तब जाकर आपूर्ति शुरू हुई लेकिन गंदा पानी आने लगा।
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पार्षदों के साथ स्थानीय लोगों की शिकायत पर टंकी की जांच हुई तो उसमें से भारी मात्रा में गंदगी, सीमेंट की बोरियां आदि निकली। सफाई के बाद टंकी से आपूर्ति शुरू हुई लेकिन इससे अब तक नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है। यही हाल अशोक नगर और करेली का भी है। इन टंकियों से भी पानी की आपूर्ति आधे-एक घंटे से ज्यादा नहीं होती। यहां की समस्या भी ट्यूबवेल का पूरी क्षमता से न चलना ही है।

कालिंदीपुरम स्थित पानी की टंकी अब तक पूरी नहीं हो सकी है। बनने के बाद इसकी टेस्टिंग हुई तो लीकेज शुरू हो गया। जलकल विभाग ने जल निगम से टंकी की मरम्मत को कहा। कई बार काम भी शुरू हुआ लेकिन मरम्मत का काम अब तक पूरा नहीं किया जा सका है।

जल निगम ने पेयजल लाइनों में लीकेज खोजने के लिए लीक डिटेक्टर मशीनें तो खरीद लीं लेकिन यह मशीनें आने के बाद से ही ताले में बंद हैं। करीब दो वर्ष पहले मशीन खरीदने का फैसला हुआ। इसके बाद जल निगम ने इन मशीनों का आर्डर दिया। करोड़ों लागत वाली चार सेट मशीनें आईं तो कुछ समय तो जल निगम के ताले में बंद रहीं। इसके बाद उसे जलकल विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया।

कहा गया कि कंपनी के प्रतिनिधि जलकल विभाग के कर्मियों को मशीन चलाने का प्रशिक्षिण देने आएंगे। पिछले वर्ष कंपनी के प्रतिनिधि आए। फिर मशीनें निकाली गईं तो पता चला कि वह तो वाईफाई सिस्टम के बिना चल ही नहीं सकतीं। इस बीच कर्मियों का प्रशिक्षण तो हो गया लेकिन मशीन फिर से जलकल विभाग के ताले में बंद हो गई। जलकल विभाग के जीएम वीएन द्विवेदी ने जल निगम के अधिशाषी अभियंता को पत्र लिखा तो जवाब मिली कि अब मशीनों को रेडियो सिंगल से लैस किया जाएगा लेकिन यह काम अब तक नहीं हुआ। इसकी वजह से पानी की बर्बादी रोकने में जलकल विभाग असफल साबित हो रहा है।
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