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मैनेजर का बयान दर्ज, ईओडब्ल्यू को ट्रांसफर होगा मामला

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Manor's statement will be recorded, transfer to EOW
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मैनेजर का बयान दर्ज, आरोपी घर पर ताला लगाकर फरार
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बीओआई की सुलेमसराय शाखा में गबन का मामला
4.25 करोड़ रुपये की अनियमितता आई थी सामने
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। बैंक ऑफ इंडिया की सुलेमसराय शाखा से 4.25 करोड़ रुपये गायब होेने के मामले में सोमवार को पुलिस ने वादी मुकदमा का बयान दर्ज किया। उधर, मामले में नामजद आरोपी करेंसी चेस्ट अधिकारी घर में ताला लगाकर फरार है। पुलिस का कहना है कि उसकी तलाश की जा रही है।
बैंक ऑफ इंडिया की सुलेमसराय शाखा में तीन जुलाई को मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था। यहां आंतरिक लेखा परीक्षण के दौरान 4.25 करोड़ की अनियमितता पाई गई। वरिष्ठ शाखा प्रबंधक रायबरेली निवासी विवेक गुप्ता ने मामले में तत्कालीन करेंसी चेस्ट अधिकारी वशिष्ठ कुमार राम समेत तीन पर नामजद मुकदमा दर्ज कराया है। सोमवार को पुलिस ने उनका बयान दर्ज किया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि आंतरिक लेखा परीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर जब आरोपी अधिकारी से पूछताछ की गई तो उसने ग्रामीण बैंक को रकम देने की बात बताई। यही नहीं, उसने लेजर में इसकी इंट्री भी कर दी थी। हालांकि जब उससे वाउचर मांगा गया तो वह हड़बड़ा गया। इसके बाद कड़ाई से पूछताछ पर बताया कि ब्याज पाने के लिए उसने यह रकम अपने जानने वाले एसके मिश्र व उसके पुत्र संजू मिश्र को दी है। पुलिस सूत्रों की मानें तो आरोपी अधिकारी मूल रूप से बलिया का रहने वाला है और वर्तमान में वह सुलेमसराय के गुलटेरिया रेजीडेंसी स्थित फ्लैट में रहता है। हालांकि वहां जाने पर उसके फ्लैट में ताला लगा मिला। यह भी पता चला कि आरोपी को आखिरी बार चार दिन पहले देखा गया था। पुलिस का कहना है कि उसकी तलाश की जा रही है। जल्द ही एक टीम बलिया स्थित उसके मूल निवास पर भेजी जाएगी। उसके पकड़े जाने के बाद ही अन्य दोनों आरोपियों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
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ईओडब्ल्यू को सौंपी जा सकती है जांच
सूत्रों की मानें तो तहरीर के आधार पर भले ही रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस जांच में जुटी हो लेकिन मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू)को भी सौंपी जा सकती है। दरअसल मामला करोड़ों के गबन का है, ऐसे में केस की जांच आर्थिक अपराध विशेषज्ञों से कराया जाना जरूरी है। यही वजह है कि माना जा रहा है कि इस केस की जांच भी ईओडब्ल्यू से कराई जा सकती है। इस बारे में सीओ वृजनारायण सिंह का कहना है कि मामला ईओडब्ल्यू को ट्रांसफर किए जाने के संबंध में फिलहाल उन्हें कोई आदेश नहीं मिला है। पुलिस अपने स्तर से जांच कर रही है।
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