महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी महर्षि याज्ञवल्क्य के आमंत्रण ‘तीरथपतिहि आव सब कोई’ को स्वीकार करते हुए शनिवार को संगम की रेती को प्रणाम किया तो अद्भुत आनंद से आह्लादित हो उठे। अदृश्य सरस्वती के साथ गंगा-यमुना की धाराओं के संगम को समझते, आत्मसात करते हुए रेती पर आगे बढ़ते राष्ट्रपति ने मोटरबोट में बैठकर जी भर संगम को निहारा। अक्षयवट, माघ मेले और बड़े हनुमान का महात्म्य समझा। इस बीच संगम पहुंचकर पत्नी संग पूरे मनोयोग से गंगा का पूजन किया और फिर शीश नवाकर राष्ट्र के सर्वमंगल के लिए संगम जैसा ही समन्वय, सद्भाव और समरसता का आशीष मांगा।
इलाहाबाद प्रवास के दूसरे दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का काफिला सुबह तकरीबन 8.20 बजे संगम नोज पर पहुंचा। वह स्टीमर से संगम के मध्य पहुंचे जहां विशेष जेटी बनाई गई थी। पूजन से पहले राष्ट्रपति ने गंगाजल से आचमन कर स्वयं को शुद्ध किया। संगम प्रयाग महाआरती के व्यवस्थापक प्रदीप पांडेय के आचार्यत्व में सात बटुकों, तीन सहयोगियों संग तीन आचार्यों ने गंगा पूजन कराया। पूजन के बाद राष्ट्रपति ने रेती पर लगने वाले माघ मेले में दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं के कल्याण और संपूर्ण विश्व में शांति के लिए प्रार्थना की।
मेला क्षेत्र को निहारते हुए राष्ट्रपति तकरीबन नौ बजे बड़े हनुमान मंदिर पहुंचे जहां अखिल अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और व्यवस्थापक स्वामी आनंद गिरि की देखरेख में 51 बटुकों ने पूजन कराया। पूजन में पत्नी सविता कोविंद, पुत्र प्रशांत के साथ राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री डॉ.सिद्धार्थ नाथ सिंह, डॉ.रीता बहुगुणा जोशी, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, महापौर अभिलाषा गुप्ता भी शामिल रहीं। इस दौरान संगम नोज तथा हनुमान मंदिर के साथ ही पूरा मेला क्षेत्र छावनी में तब्दील रहा। इससे पहले संगम की रेती पर पहुंचने पर उनका परंपरागत तरीके से स्वागत हुआ।
संगम और बड़े हनुमान केपूजन के बाद राष्ट्रपति का काफिला तकरीबन पौने दस बजे हाईकोर्ट के लिए रवाना हुए। यहां से वह तकरीबन बारह बजे नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। तकलीफ की वजह से संगम पूजन के दौरान राष्ट्रपति, उनकी पत्नी के अतिरिक्त राज्यपाल भी कुर्सी पर ही बैठे। हालांकि मुख्यमंत्री तथा अन्य नेताओं ने जेटी पर बैठकर ही पूजन किया। खास यह कि आचार्यों संग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मंत्रोच्चार किया।
राष्ट्रपति ने गंगा पूजन और हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद, दोनों जगहों पर बंद लिफाफे में दक्षिणा भेंट की। इस बावत पूछने पर गंगा पूजन कराने वाले आचार्य प्रदीप पांडेय ने कहा, ‘यह मायने नहीं रखता कि लिफाफे में क्या है बल्कि राष्ट्रपति से ऐसी दक्षिणा पाना ही सम्मान की बात है। लिफाफा बाद में खोला जाएगा।’ वहीं हनुमान मंदिर में बंद लिफाफे में मिली राशि दानपात्र में डाल दी गई, इसे भी बुधवार को खोला जाएगा।
गंगा पूजन के बाद राष्ट्रपति ने माघ मेला तथा प्रयाग के पर्यटन पर आधारित वीडियो फिल्म भी देखी। इसे मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के विद्यार्थियों ने तैयार किया है। फिल्म को माघ मेला की वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है। हालांकि राष्ट्रपति गंगा पूजन के बाद सीधे बड़े हनुमान मंदिर जाना चाहते थे लेकिन डीएम सुहास एलवाई और एसडीएम मेला राजीव राय ने वीडियो दिखाने के लिए उनसे दो मिनट का वक्त मांगा। राष्ट्रपति आगे बढ़ने लगे तो मुख्यमंत्री ने दो मिनट रुककर वीडियो देखने का अनुरोध किया। तब राष्ट्रपति ने संगम नोज पर ही तैयार विशेष कॉटेज में कैमरे की नजर से संगमनगरी का नजारा देखा।
संगम की रेती पर पहुंचने पर लोक कलाकारों ने सांस्कृतिक विविधता के साथ राष्ट्रपति का स्वागत किया। भारतीय लोक कला महासंघ की ओर से प्रत्येक ब्लाक से दो-दो कलाकारों का चयन किया गया था, जिन्होंने परंपरागत तरीके से संगम की छवियों के साथ महामहिम का स्वागत, अभिनंदन किया। बाद में राष्ट्रपति ने संयोजक लोककलाविद् अतुल यदुवंशी तथा अन्य कलाकारों से मुलाकात करके उन्हें सराहा और उनका हौसला बढ़ाया।
स्वागत और तैयारियों में लगे कर्मचारियों के लिए भी शनिवार का दिन यादगार बन गया। विदा होने से पहले राष्ट्रपति ने उनकी सेवाओं को सराहा और बतौर इनाम प्रशस्तिपत्र सहित पांच हजार रुपये की धनराशि भी डीएम को भेंट की। डीएम सुहास एलवाई का कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से तैयारी में लगे सभी कर्मचारियों के लिए यह सम्मान की बात है। यह राशि सर्किट हाउस से संगम तक व्यवस्था में लगे सभी कर्मचारियों के बीच बांटी जाएगी।
रामनाथ कोेविंद संगम पहुंचने वाले देश के तीसरे राष्ट्रपति हैं। वहीं वह दूसरे राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने बड़े हनुमानजी के दर्शन किए। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने बताया कि इनसे पहले बाबू राजेंद्र प्रसाद तथा वेंकेटरमन ने गंगा पूजन किया था। देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने बड़े हनुमानजी के दर्शन भी किए थे।
अब शासन, जिला प्रशासन की ओर से होने वाली गंगा आरती का दायित्व वहन करेगा। संगम प्रयाग महाआरती के आचार्य प्रदीप पांडेय ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा आरती की सराहना के साथ ही भरोसा दिलाया है कि प्रदेश सरकार की ओर से भव्य आरती की व्यवस्था की जाएगी।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि देश सनातन धर्म की ओर बढ़ रहा है और यह सुखद है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संगमनगरी में प्रवास के दौरान सनातन धर्म का मान बढ़ाया। भव्य और दिव्य कुंभ की परिकल्पना के साथ मुख्यमंत्री खुद कई बार संगम आ चुके हैं। ऐसे में राष्ट्रपति का गंगा पूजन और बड़े हनुमानजी के दर्शन के लिए आना और भी सुखद तथा स्वागतयोग्य है।