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Makar Sankranti : सूर्य देव का मकर राशि में गोचर के बाद शुरू होंगे मांगलिक कार्य, कल होगा पुण्यकाल

Wed, 14 Jan 2026 07:22 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

ग्रहों में राजा सूर्यदेव का गोचर अपने स्वाभाविक संचरण के क्रम में राशि मकर में होने के साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। यह गोचर माघ कृष्ण पक्ष की उदय कालिक एकादशी तिथि 14 जनवरी दिन बुधवार को रात में 9:19 बजे से होगा।
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मकर संक्रांति के पहले षटतिला एकादशी पर संगम में स्नान करते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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ग्रहों में राजा सूर्यदेव का गोचर अपने स्वाभाविक संचरण के क्रम में राशि मकर में होने के साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। यह गोचर माघ कृष्ण पक्ष की उदय कालिक एकादशी तिथि 14 जनवरी दिन बुधवार को रात में 9:19 बजे से होगा। इसी के साथ सूर्य देव अपनी उत्तरायण की यात्रा आरंभ करेंगे और खरमास का समापन हो जाएगा। सूर्य की मकर राशि में संक्रांति रात में 9:19 बजे होने की वजह से संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को होगा।

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प्रदोष काल में संक्रांति लगती है तो पुण्यकाल दूसरे दिन तक

उत्थान ज्योतिष एवं अध्यात्म संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के मुताबिक, देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु से शनि देव की पहली राशि मकर में सूर्य का गोचर फलदायी होता है। तिथि और मुहूर्त के लिए शास्त्रों के अनुसार देखा जाए तो यदि प्रदोष काल के बाद रात में किसी भी समय संक्रांति लगती है तो उसका पुण्यकाल दूसरे दिन तक होता है। संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी दिन को दोपहर 1:19 बजे तक रहेगा।

इस कारण से मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। मकर संक्रांति पर गंगा नदी, यमुना या अन्य नदी, तीर्थ क्षेत्र के सरोवर आदि में स्नान करके पुण्य फल को प्राप्त किया जा सकता है। मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाना, किसी को खिचड़ी खिलाना एवं दान करना शुभ फलदायक माना गया है। इस दिन ऊनी वस्त्र, मोजा, कंबल, छाता, धार्मिक पुस्तकें, पंचांग तथा अन्न का दान करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में मकर संक्रांति पर प्रयागराज के पवित्र तट पर स्नान दान का बड़ा महत्व बताया गया है।

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दुर्लभ है षटतिला एकादशी-संक्रांति का संयोग, तिल निर्मित वस्तुओं का करें दान

तीर्थ पुरोहित कृष्णा तिवारी के मुताबिक इस वर्ष मकर संक्रांति पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस वर्ष इसी दिन माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे षट्तिला एकादशी भी कहते है घटित हो रही है। एक ही दिन यह दोनों पर्वों का एक साथ घटित होना अपने आप में ही दुर्लभ संयोग है। मकर संक्रांति पर्व पर स्नान दान अन्न-वस्त्र दान करने की परंपरा है लेकिन एकादशी तिथि को अन्न का दान वर्जित भी है। ऐसी स्थिति में एकादशी व्रत करने या मानने वाले अन्न के रूप में तिल तथा तिल से निर्मित गजक, लड्डू आदि का दान करें। अन्नदान का संकल्प कर अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर उस संकल्पित अन्न का दान कर पुण्य अर्जित कर सकते हैं।
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