स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बेली अस्पताल ब्लड बैंक सहित प्रतापगढ़, कौशाम्बी में हुए रक्तदान शिविरों में 110 रक्तदाताओं ने रक्तदान कर मानवता का मान रखा। शिविराें में युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों सामाजिक संस्थाओं से जुड़े पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं ने करीबियों, परिचितों सहित मौजूदगी दर्ज कराई। शिविर में कई ऐसे रक्तदाता भी शामिल हुए जो स्वास्थ्य कारणों से रक्तदान तो नहंीं कर सके लेकिन उन्होंने साथी रक्तदाताओं को प्रेरित, प्रोत्साहित जरूर किया। हालांकि ऐसे सभी रक्तदाताओं ने निश्चित अवधि के बाद रक्तदान के लिए संकल्प लेते हुए पंजीकरण भी कराया।
बेली अस्पताल में हुए रक्तदान शिविर में बतौर मुख्य अतिथि जिलाधिकारी संजय कुमार ने रक्तदान शिविर के लिए अमर उजाला फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की। कहा, रक्त की कमी से किसी मरीज की जान न जाने पाए, इसके लिए शैक्षणिक, सामाजिक संस्थाओं की मदद से जिले भर में जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। अमर उजाला के संपादक डॉ.सचिन शर्मा ने कहा कि सामाजिक सरोकारों की प्रतिबद्धता के तहत अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से जरूरतमंदों की मदद के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, रक्तदान शिविर इसी पहल का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
रक्तदान शिविर में सीएमओ डॉ.पद्माकर सिंह, एसीएम (द्वितीय) बसंत अग्रवाल, बेली अस्पताल के सीएमएस डॉ.वीके सिंह, ब्लड बैंक प्रभारी डॉ.एसके श्रीवास्तव, वरिष्ठ पैथालॉजिस्ट डॉ.नीता साहू समेत कई डॉक्टर, कर्मचारी, सहायक उपस्थित थे।
अमर उजाला फाउंडेशन के रक्तदान शिविर में युवाओं ने जबर्दस्त उत्साह दिखाया। विश्वविद्यालय, स्कूल-कालेजों के विद्यार्थी दोस्तों संग रक्तदान शिविर में पहुंचे और रक्तदान किया। इतना ही नहीं इन युवाओं ने रक्तदान को लेकर व्याप्त भ्रंातियों के निराकरण में भी भूमिका निभायी और उसे दूर करने के लिए लोगों को जागरूक करने का संकल्प भी लिया। पूर्व के रक्तदाताओं के अनुभवों और उनके प्रोत्साहन से कई नए लोगों ने बिना झिझक रक्तदान किया। शिविर में युवा पीढ़ी ही नहीं कई अधिवक्ताओं, महिलाओं, अधिकारियों, समाजसेवियों ने भी रक्तदान कर मानवता का मान रखते हुए सामाजिक दायित्वों का निर्वाह किया। जागरूक और उत्साही रक्तदाताओं में कई ऐसे भी शामिल थे जो रक्तदान के लिए विशेष तौर पर अपने दफ्तारों से अवकाश लेकर पहुंचे।
शिविर केदौरान तमाम युवाओं ने दोबारा रक्तदान का संकल्प लिया। रक्तदाताओं विश्वविद्यालय की प्रिया मालवीय, हिमानी शर्मा, तरन्नुम हफीज, नम्रता खन्ना, अभिजीत सिंह, संतोष कुमार सिंह, आशुतोष शाही आदि ने माना कि रक्तदान से खुशी और संतुष्टि मिली। वहीं उन्होंने निश्चित अवधि के बाद दोबारा मतदान के लिए भी इच्छा जताई।
स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में तमाम ऐसे रक्तदाताओं खासकर युवतियों ने रक्तदान न कर पाने पर मायूसी जताई। दरअसल निर्धारित मानक से कम हीमोग्लोबिन के कारण वे रक्तदान नहीं कर सकीं। उनके चेहरों पर इसका मलाल साफ झलक रहा था। उन्होंने पैरामेडिकल स्टाफ से कहा ‘सर कुछ कीजिए, मेरा रक्त जरूर लीजिए’। इन युवाओं ने चिकित्सकों से यह जाना कि आखिरकार हीमोग्लोबिन किस वजह से कम होता है और इसकी पूर्ति कैसे की जा सकती है। ऐसे रक्तदाताओं के चेहरे पर खिन्नता का भाव तो दिखा लेकिन उन्होंने पूरे हौसले से मानक पूरा होने पर रक्तदान की इच्छा जताई। संकल्प लिया कि रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा पूरी करके दोबारा रक्तदान करने आएंगे।