कलाग्राम में कार्यक्रम प्रस्तुत करतीं मैथिली ठाकुर।
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कलाग्राम में ऐसा सांस्कृतिक महाकुंभ लगा है, जिसमें कश्मीर से कन्याकुमारी तक झलक दिख रही है। सांस्कृतिक कुंभ के पांचवें दिन लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने समां बांधा। उनके मंच पर आते ही मौजूद श्रोताओं तालियों से उनका जोरदार स्वागत किया। अपनी प्रस्तुति से उन्होंने हर किसी की जुबान पर राम जी से पूछे जनकपुर की नारी से, छाप तिलक सब छीनी' जैसे गीतों की प्रस्तुति से सबका दिल जीत लिया। गुरुवार को शाम मैथिली ठाकुर की सुरमयी आवाज का जादू हर किसी को दीवाना कर दिया।
भजनों से लेकर सूफी संगीत तक अपनी आवाज का जादू बिखेरा। शानदार प्रस्तुतियों से सभी का दिल जीत लिया। मैथिली ने सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आए हैं', , छाप तिलक सब छीनी' लोगवा देत कहे गारी, बता दा बबुआ ' श्याम आन बसो वृन्दावन मे, मेरी उमर बीत गयी गोकुल में, छाप तिलक सब छीनी', 'मेरे रश्के कमर तूने पहली नजर', कभी राम बनके कभी श्याम बनके को प्रस्तुत कर पूरे पंडाल को भक्तिमय कर दिया और मेरे झोपड़ी के भाग खुल जाएंगे राम आएंगे। आदि गाने पर तान छेड़ी तो लोग मंत्रमुग्ध हो उठे।