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महंत राजेंद्र दास बोले : अखाड़ों के स्नान का क्रम उनकी स्थापना के क्रम में हो, किन्नर अखाड़े अंत में मिले मौका

Mon, 16 Sep 2024 02:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

महंत राजेंद्र दास ने इस माह के अंत में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक के पूर्व बयान देकर इस बात के संकेत भी दे दिए हैं कि बैठक में अखाड़ों के बीच चल रहे तमाम विवाद सामने आ सकते हैं।
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कुंभ मेला, प्रयागराज। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राजेंद्र गुट के सचिव श्रीमहंत राजेंद्र दास ने पंचदशनाम जूना अखाड़ा और आह्वान अखाड़े के अधिकारों पर सवाल खड़े किए हैं। अनि अखाड़े के सचिव पद की जिम्मेदारी संभाल रहे महंत राजेंद्र दास ने कहा परंपरा के अनुसार देश में सनातन धर्म की रक्षा के लिए 13 अखाड़े अलग-अलग समय पर स्थापित हुए। लेकिन विलय के कारण स्नान क्रम ऊपर-नीचे हो गया। ऐसे में अखाड़ों के स्नान का क्रम भी उनकी स्थापना के क्रम में होना चाहिए।

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महंत राजेंद्र दास ने इस माह के अंत में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक के पूर्व बयान देकर इस बात के संकेत भी दे दिए हैं कि बैठक में अखाड़ों के बीच चल रहे तमाम विवाद सामने आ सकते हैं।

महाकुंभ में सभी 13 अखाड़ों को अलग-अलग समूहों में बांटकर स्नान कराया जाता है। महानिर्वाणी अखाड़े के साथ अटल अखाड़ा तो निरंजनी अखाड़े के साथ आनंद अखाड़ा रहता है। जूना अखाड़े के साथ आह्वान और श्रीपंच अग्नि अखाड़ा रहता है। इसी तरह उदासीनों में बड़ा उदासीन, नया उदासीन और निर्मोही अखाड़ा एक साथ रहते हैं और अनियों में महानिर्वाणी अनि, दिगंबर अनि और निर्मोही अनी अखाड़ा एक साथ रहते हैं।
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महंत राजेंद्र दास ने सवाल उठाया है कि आह्वान अखाड़े को बराबर जमीन व सुविधा दी जानी चाहिए। जो सुविधा बंटे उसमें आह्वान अखाड़े के साधु संतों को उतनी ही सुविधा दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुंभ में किन्नर अखाड़े का स्नान जूना के साथ हुआ था। इस बार किन्नर अखाड़े का स्नान सभी 13 अखाड़ों के बाद होना चाहिए।

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2024 में 1478 वर्ष हो जाएगा आह्वान अखाड़ा

महंत राजेंद्र दास का कहना है कि आह्वान अखाड़े को वर्ष 2024 में 1478 वर्ष का हो जाएगा। आह्वान अखाड़ा 547, अटल 647, महानिर्वाणी अखाड़ा 749, आनंद अखाड़ा 856, निरंजनी अखाड़ा 904, अग्नि अखाड़ा 1136, जूना अखाड़ा 1156 से महाकुंभ में स्नान करते आ रहे हैं। कहा कि सन 749 से महानिर्वाणी अखाड़ा स्नान करने लगा। अटल एवं महानिर्वाणी अखाड़ा आह्वान का ही भाग है। आनंद भी आह्वान का ही भाग है, जबकि जूना अखाड़ा आनंद व आह्वान का भाग है।

आदि शंकराचार्य ने वर्ष 800 से 801 के बीच तय किया की प्रथम शाही में आह्वान अखाड़ा, फिर अटल अखाड़ा और उसके पीछे महानिर्वाणी अखाड़ा स्नान करेगा। दूसरे शाही स्नान में अटल अखाड़ा आगे उस के पीछे महानिर्वाणी अखाड़ा और उस के पीछे आह्वान अखाड़े का स्नान होगा। इसी तरह तीसरे शाही स्नान में महानिर्वाणी आगे उस के पीछे आह्वान और उस के पीछे अटल स्नान करेगा।
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