बाढ़ के बाद गंगा के कछार से पानी निकलने की रफ्तार काफी धीमी है। कुछ दिनों पहले तक पूरा मेला क्षेत्र बाढ़ की पानी में डूबा रहा। ऐसे में मेला बसाने का काम 15 से 20 दिन पीछे हो गया है, हालांकि परेड के अलावा बांध और संगम के बीच पानी निकल गया है।
गंगा नदी का पानी निकलने के साथ मेला बसाने का काम गति पकड़ने लगा है। संगम, परेड तथा अरैल के बाद शुक्रवार को झूंसी की तरफ भी ट्रैक्टर एवं जेसीबी उतारकर समतलीकरण का काम शुरू हो गया। हालांकि, मेला क्षेत्र के बड़े भूभाग में अब भी पानी भरा हुआ है, जो मेला प्रशासन के लिए चुनौती बना है।
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बाढ़ के बाद गंगा के कछार से पानी निकलने की रफ्तार काफी धीमी है। कुछ दिनों पहले तक पूरा मेला क्षेत्र बाढ़ की पानी में डूबा रहा। ऐसे में मेला बसाने का काम 15 से 20 दिन पीछे हो गया है, हालांकि परेड के अलावा बांध और संगम के बीच पानी निकल गया है।
करीब एक सप्ताह पहले गंगा के दोनों तरफ बनाए जा रहे रिवर फ्रंट रोड और हनुमान मंदिर कॉरिडोर के काम शुरू हो गए। संगम से बांध के बीच मेला के लिहाज से अस्थायी निर्माण कार्य भी शुरू हो गए। इसके अलावा नैनी तथा अरैल क्षेत्र में भी काम शुरू हो गए हैं।
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खास यह कि संगम पर सर्कुलेटिंग एरिया बढ़ाने के लिए गंगा की कई छोटी-छोटी धाराओं की जगह एक धारा बनाने का निर्णय लिया गया है। सिंचाई विभाग की ओर से इसके लिए ड्रेजिंग का काम भी दो दिन पहले शुरू कर दिया गया।
मेला प्रशासन के लिए राहत की बात यह है कि शुक्रवार को झूंसी की तरफ भी मेला बसाने का काम शुरू हो गया। हालांकि उस तरफ अब भी पानी भरा है, साथ ही दलदल की भी शिकायत है। ऐसे में पहले दिन दो टापूनुमा सूखे स्थान पर तीन ट्रैक्टर एवं एक जेसीबी से ही काम शुरू हुआ। पानी निकलने तथा दलदल सूखने के साथ एक-दो दिनों में काम में तेजी आने की उम्मीद है।
महाकुंभ से पहले प्लास्टिक मुक्त एवं स्वच्छ होगा शहर
महाकुंभ से पहले शहर को स्वच्छ रखने एवं प्लास्टिक मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन एवं नगर निगम ने वृहद योजना बनाई है। डीएम ने बताया कि इसके लिए अलग-अलग पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इनमें शहर के अलग-अलग वर्ग के लोगों को जोड़ा जाएगा। प्रतिबंधित प्लास्टिक की बिक्री पर प्रभावी रोक के लिए कार्रवाई की भी योजना बनाई गई है। जल्द ही चरणबद्ध तरीके अभियान शुरू होगा।