गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के संगम पर इस बार ज्ञान का महाकुंभ भी लगेगा। इसमें देश से एक हजार से अधिक शिक्षाविद वैदिक गणित, भारतीय भाषा और आत्मनिर्भर शिक्षा प्रणाली पर मंथन करेंगे। इस दौरान वैदिक गणित और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर विशेष कक्षाएं चलेंगी।
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में रविवार को शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने बताया कि ज्ञान महाकुंभ की शुरुआत 10 जनवरी से होगी। इसमें विश्वविद्यालयों के कुलपति व अन्य शिक्षाविद, केंद्र व राज्य सरकार के शिक्षा मंत्री और सचिव स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। महाकुंभ को ‘हरित महाकुंभ’ बनाने के लिए कचरा प्रबंधन व पर्यावरण संरक्षण पर विशेष कार्य होंगे। ‘एक थैला, एक थाली योजना’ योजना के तहत मेले में 30 लाख थैले और थालियां बांटी जाएंगी। 31 जनवरी को हरित महाकुंभ का आयोजन होगा।
ज्ञान महाकुंभ में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पुस्तक स्टॉल व प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। एक फरवरी को ‘देश का नाम भारत’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। सात फरवरी को निजी शैक्षिक संस्थाओं की भूमिका पर राष्ट्रीय सम्मेलन, आठ फरवरी को महिला सम्मेलन, छात्र सम्मेलन व आचार्य सम्मेलन, भारतीय ज्ञान परंपरा व भारतीय भाषा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। नौ फरवरी को ‘शासन-प्रशासन की शिक्षा में भूमिका’ विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन होगा।
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने बताया कि विवि में जनजातीय बच्चों के लिए ‘स्वाभिमान थाली’ योजना चलाई जा रही है, जिसमें बच्चों को 10 रुपये में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। ‘सुदामा योजना’ के तहत कुलपति कोष में अब तक 70 लाख रुपये जमा किए जा चुके हैं। ज्ञान महाकुंभ में अन्य संस्थानों को भी इस तरह के नवाचारों के लिए प्रेरित किया जाएगा।