चारों धाम की कर चुके हैं यात्रा
उन्हाेंने बताया कि वह 2000 किमी पैदल चलकर चाराें धाम की यात्रा कर चुके हैं। वह अपने साथ एक डायरी रखते हैं, जिसमें वह पंच कोष के बारे में लिखा है। पहला आनंद कोष है जिसको समझाते हुए बताया कि आनंद कोष वह है जिसमें कोई बनावटी न हो, बिल्कुल जैसा का तैसा दिखाया या बताया जाय, दूसरा विज्ञान कोष, जिसमें हम अलग-अलग चीजों में फर्क को समझ पाते हैं।
तीसरा मनोमय कोष, इस कोष में हम किसी चीज को देखकर याद कर लेते हैं। चौथा प्राणमय कोष, इसके अंतर्गत हमारी शारीरिक गति विधि आती है। अंतिम और पांचवा अन्न कोष, इस कोष में हम किसी चीज को खाकर उसके बारे में महसूस करते हैं। उधर, उनके गुरु महंत हीरापुरी महाराज ने बताया कि अभी अभय सिंह उनके पास संन्यासी नहीं बल्कि साधक के रूप में आए हैं। उन्हें भगवत जाप करने के लिए कहा गया है, अभी उनकी कई तरह की परीक्षा होगी। उसमें सफल होने पर ही उन्हें दीक्षा दिया जाएगा।