महाकुंभनगर। संगम की रेती पर अखाड़ों की बसावट हो गई है। इसके साथ साधु-संत भी जप-तप करने पहुंच गए हैं। मेला क्षेत्र में लगी दुधिया लाइटें इस कदर रोशनी बिखेर रही है मानों तारे जमीन पर उतर आए हों।
महाकुंभनगर। संगम की रेती पर अखाड़ों की बसावट हो गई है। इसके साथ साधु-संत भी जप-तप करने पहुंच गए हैं। मेला क्षेत्र में लगी दुधिया लाइटें इस कदर रोशनी बिखेर रही है मानों तारे जमीन पर उतर आए हों। इन्हीं आभा मंगल को देखने नीदरलैंड से पीटर और अल्बर्ट संगम पहुंचे। उन्होंने भारतीय भोजन और मेले की सुरक्षा व्यवस्था को खूब सराहा। उन्हें साधु-संतों की झोपड़ी और उनके रहन-सहन बहुत अच्छा लगा। इतनी सर्दी में नागा साधु बिना कपड़े के रहते हैं, यह बहुत अद्भुत है।
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वहीं, अल्बर्ट ने कहा, मेले में 45 करोड़ लोग आएंगे, इस बात पर भरोसा नहीं होता है। भारत में उनका पांच दिन का टूर है। दिल्ली, हैदराबाद और खजुराहो होते हुए यहां पर पहुंचे हुए हैं। प्रयागराज में एक दिन के लिए रुके हुए हैं। इसके बाद एक दिन वाराणसी रुकने के बाद नीदरलैंड लौट जाएंगे।