उधर हादसे में बचाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती दो लोगों में से महावीर प्रसाद (65) ने बुधवार रात 8:00 बजे के करीब दम तोड़ दिया। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर संतोष सिंह ने बताया कि फेफड़ों में पानी भर जाने के कारण वह सांस नहीं ले पा रहे थे। ऐसे में उन्हें बाईपैक विधि से सांस दी जा रही थी। हालांकि तबीयत बिगड़ती चली गई और फिर उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।
रात 8:00 बजे के करीब उनकी सांसें थम गईं। अस्पताल पहुंचे रिश्तेदार रामगोपाल मित्तल ने बताया कि अस्पताल में भर्ती बृजलाल प्रसाद (65) की भी हालत गंभीर बनी हुई है। मृतक महावीर बृजलाल की बुआ के लड़के थे। उन्होंने बताया कि घरवाले पोस्टमार्टम नहीं करना चाहते हैं और इस संबंध में पुलिस को लिखकर दे दिया गया है। वह सुबह शव लेकर देहरादून के लिए रवाना होंगे।
करोड़ों के उपकरण, जल में सुरक्षा के दावों पर सवाल
संगम में डूबे दो स्नानार्थियों का 24 घंटे बाद भी सुराग नहीं मिलने पर सुरक्षा संबंधी इंतजाम को लेकर दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। महाकुंभ से पहले करोड़ों के अंडरवाटर ड्रोन, सोनार, लाइफबॉय समेत जो अन्य उपकरण खरीदे गए, वह आखिर काम क्यों नहीं आए। स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिए जल पुलिस, पीएसी, एनडीआरफ-एसडीआरएफ के साथ ही देशभर से बुलाए गए डीप डाइवर व सैकड़ों की संख्या में प्राइवेट गोताखोरों को भी स्नान घाटों पर तैनात करने का दावा पुलिस प्रशासन की ओर से किया गया था।
यह भी कहा गया था कि जल में सुरक्षा के लिए मंगाए गए अत्याधुनिक उपकरण नदी में कोई हादसा होने पर त्वरित सहायता पहुंचाने में मददगार साबित होंगे। हालांकि, मंगलवार को हादसे के दौरान यह सारे इंतजाम धरे रह गए।
ऐसे था हादसा
देहरादून के छह और बंगलूरू के तीन श्रद्धालु मंगलवार दोपहर स्नान करने अरैल से संगम पर पहुंचे थे। स्नान करने के बाद सभी वापसी के लिए नाव पर चढ़ने लगे और इसी दौरान एक तरफ भार ज्यादा हो जाने के कारण नाव पलट गई। इससे उसमें सवार श्रद्धालु संगम में गिर गए और डूबने लगे। इनमें से बंगलूरू के तीन और देहरादून के चार श्रद्धालुओं को बचा लिया गया। जबकि, दो लापता हो गए थे। लगातार दूसरे दिन भी घंटों तलाश किए जाने के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चल सका।