सनातन संस्कृति को विश्व पटल पर क्रियायोग अभ्यास के जरिए पहुंचाने वाली आध्यात्मिक संस्था क्रियायोग आश्रम एवं अनुसंधान संस्थान महाकुंभ में भूमि आवंटन की परंपरा बचाने के लिए अडिग है। परंपरागत इस संस्था को मुक्ति मार्ग-मोरी मार्ग पर भूमि मिलती रही है, लेकिन इस बार मेला क्षेत्र से 10 किमी दूर फाफामऊ में बसावट का संदेश मिलने के बाद विवाद खड़ा हो गया है।
सनातन संस्कृति को विश्व पटल पर क्रियायोग अभ्यास के जरिए पहुंचाने वाली आध्यात्मिक संस्था क्रियायोग आश्रम एवं अनुसंधान संस्थान महाकुंभ में भूमि आवंटन की परंपरा बचाने के लिए अडिग है। परंपरागत इस संस्था को मुक्ति मार्ग-मोरी मार्ग पर भूमि मिलती रही है, लेकिन इस बार मेला क्षेत्र से 10 किमी दूर फाफामऊ में बसावट का संदेश मिलने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। मेलाधिकारी विजय किरन आनंद को आवंटन के लिए नए सिरे से आवेदन देने के साथ ही संस्थान के अध्यक्ष योगी सत्यम ने दो टूक कहा है कि अगर परंपरा के विपरीत मुक्ति मार्ग पर भूमि नहीं मिली तो महाकुंभ में क्रियायोग का शिविर नहीं लगाया जाएगा।
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मेला प्राधिकरण के रिकॉर्ड के मुताबिक क्रियायोग आश्रम एवं अनुसंधान संस्थान की सहयोगी संस्था योग सत्संग समिति को वर्ष 1995 में त्रिवेणी मार्ग पर भूमि मिली थी। तब पेरू के अंबेसडर ने क्रियायोग के शिविर में ही महीने भर प्रवास किया था।
विदेशी भक्तों की भीड़ की वजह से जगह कम पड़ गई थी। तब कहा गया था कि बाद के मेलों मे भूमि बढ़ाकर दी जाएगी। इसके बाद विदेशी अनुयायियों की भीड़ को देखते हुए वर्ष 2001, 2007 और 2013 के कुंभ में क्रियायोग की इस समिति को आश्रम के निकट मुक्ति मार्ग-मोरी मार्ग पर भूमि मिलती रही है।
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संस्थान के अध्यक्ष का कहना है कि वर्ष 2019 में झूठी शिकायत के आधार पर स्थान परिवर्तन किया गया, लेकिन मौखिक रूप से भरोसा दिलाया गया था कि बाद में मुक्ति मार्ग पर ही भूमि दी जाएगी, लेकिन इस बार भी साजिश की जा रही है। उन्होंने मेलाधिकारी को दिए पत्र में कहा है कि अगर मुक्ति मार्ग पर भूमि नहीं मिली तो वह महाकुंभ में प्रवेश नहीं करेंगे।