महाकुंभ में लोगों से बातचीत करते डिजिटल बाबा।
- फोटो : अमर उजाला।
फेसबुक पेजपर हैं साढ़े तीन लाख से ज्यादा फॉलोअर
गोरखपुर में पले बढ़े बी. काम. तक की पढ़ाई पूरी कर वर्ष 2008 में अयोध्या के लोमश ऋषि आश्रम के महंत स्वामी शिवचरण दास महाराज से दीक्षा प्राप्त कर डिजिटल बाबा राम प्रकाश भट्ट से स्वामी राम शंकर दास बन गए। इन्होंने भारतवर्ष के विभिन्न गुरुकुल जैसे वानप्रस्थ साधक ग्राम आश्रम साबरकांठा गुजरात, कलवा गुरुकुल जींद हरियाणा, संदीपनी हिमालय गुरुकुल चिन्मय मिशन धर्मशाला हिमाचल, बिहार स्कूल ऑफ योगा रिखियापीठ देवघर झारखंड, कैवल्यधाम योग संस्थान लोनावला महाराष्ट्र आदि स्कूलो में रह कर सात वर्षों तक सनातन धर्म के शास्त्रों, उपनिषद, रामायण, श्रीमद्भागवत गीता अद्वैत-वेदांत का भली-भांति अध्ययन किया। खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ में रह का संगीत की शिक्षा हासिल की। 2017 से डिजिटल बाबा हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ धाम में रह का अपनी आध्यत्मिक उन्नति के लिए साधनारत हैं। स्वामी राम शंकर (डिजिटल बाबा) देश भर में श्रीरामकथा एवं श्रीमद्भागवत कथा व वेदांत के प्रवचन ज्ञान सत्र में ज्ञान प्रदान करने जाते रहते हैं। डिजिटल बाबा के फेसबुक पेज पर करीब तीन लाख 50 हजार लोग फॉलो करते हैं। कुंभ मेला में डिजिटल बाबा का अनूठा व्यक्तित्व सबके बीच आकर्षण एवं कौतूहल का विषय बना हुआ है।
महाकुंभ में लोगों लोगों से बातचीत करते डिजिटल बाबा।
- फोटो : अमर उजाला।
नई पीढ़ी को आध्यात्मिक मार्ग को ओर ले जाना है उद्देश्य
डिजिटल बाबा कहते हैं कि मेरा उद्देश्य युवा पीढ़ी के साथ जुड़ कर उन्हें आध्यात्मिक मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करना है, क्योंकि आध्यात्म ज्ञान ही हमारे भटकाव को दूर कर हमारे जीवन को पूर्णता प्रदान करती है। ध्यान रहे चमत्कार से लोग आकर्षित हो सकते हैं पर आत्मा की तृप्ति के लिये आत्मज्ञान ही एकमात्र साधन है। चमत्कार देख कर लोग नमस्कर तो करते हैं पर जब सबकी अपेक्षा पूरी नहीं होती तो लोग चमत्कार दिखाने वाले कि उपेक्षा करना आरंभ करते हैं।
कोई मनुष्य चमत्कार एक निश्चित सीमा तक प्रदर्शित कर सकता है, पर उस चमत्कार से किसी का जीवन नहीं बदलता जीवन बदलता है उत्तम समझ विचार से आज नहीं तो कल सबको सब प्रपंच छोड़कर अपने आपको को जानने में लगना पड़ेगा तभी जाकर हम जन्म मरण के चक्र से छूट पाएंगे हैं। डिजिटल बाबा कहते हैं कि आजकल का युवा सोशल मीडिया में उलझ गया है। ऐसे में उसी झाल में बैठ कर उन्हें जीवन के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान उनके बीच साझा करता रहता हूं।
महाकुंभ में लोगों से बातचीत करते डिजिटल बाबा।
- फोटो : अमर उजाला।