अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन ने अपनी कृति, फालोइंग द इक्वेटर, अ जर्नी अराउंड द वर्ल्ड (1897) में वार्षिक माघ मेले के साथ ही कुंभ का भी वर्णन किया है। ...फिर हम गर्म मैदान में थे जहां सड़कें तीर्थयात्रियों से पटी दिखाई दे रही थीं। गंगा-जमना के संगम तट पर विशाल मेला था। ये तीर्थयात्री समस्त भारत से आए थे। इनमें से कुछ तो महीनों पैदल चलकर आए थे। गर्मी, धूप, धूल, भूख बस आस्था और विश्वास के सहारे। किंतु तीर्थ पहुंचकर यह लोग अत्यंत ही उत्साहित और संतुष्ट दिखे। गंगा जल का स्पर्श ही मृत और रोग वाले शरीर को जिलाने के लिए पर्याप्त है। मेले में लगभग 20 लाख लोग जुटते हैं।
सिडनी ला ने अपनी कृति, ए विजन आॅफ इंडिया एज सीन ड्यूरिंग टूर आॅफ द प्रिंस एंड प्रिन्सेज आॅफ वेल्स (1906) में कुंभ का वर्णन करते हुए कहा है, जब तक यह मेला चलता है, उस पूरी अवधि में जनसंख्या के लिहाज से यह विश्व के सबसे बड़े शहरों पीकिंग, विएना में शुमार हो जाता है, इसकी जनसंख्या लिवरपूल, मैनचेस्टर और ग्लास्गो से भी ज्यादा हो जाती है।
चांद दिखाई दे रहा है, पूर्णिमा का पूरा चांद इलाहाबाद के किले पर ऊंघता हुआ
दरवाजा खोलता हूं तो, चांद दिखाई दे रहा है, पूर्णिमा का पूरा चांद, इलाहाबाद के किले पर ऊंघता हुआ। पिछली रात उसे गंगा के भीतर देखा था, एक सफेद भुतैली सी परछाई। अब समूची रात की यात्रा से थका हुआ वह किले के माथे पर चिपका था, एक गोल, सफेद, मुरझाई बिंदी, जिसे सिर्फ एक उंगली से पोंछा जा सकता था।
-हिंदी के प्रख्यात लेखक निर्मल वर्मा ने 1976 में यात्रा संस्मरण में लिखा
प्रमुख स्नान पर्व
- पौष पूर्णिमा (13 जनवरी 2025): कल्पवास का आरंभ
- मकर संक्रांति (14 जनवरी 2025): पहला शाही स्नान
- मौनी अमावस्या (29 जनवरी 2025): दूसरा शाही स्नान
- बसंत पंचमी (3 फरवरी 2025): तीसरा शाही स्नान
- माघी पूर्णिमा (12 फरवरी 2025): कल्पवास का समापन
- महाशिवरात्रि (26 फरवरी 2025) महाकुंभ का अंतिम दिन