जेसीबी और पोकलौंड की मदद से नए चैनल के लिए ड्रेजिंग कराई जा रही है। मेला प्रशासन की योजना है कि गंगा में पूर्व दिशा की ओर यानी झूंसी की तरफ खुदाई कर दी जाए तो महाकुंभ के दौरान धारा झूंसी की तरफ खिसक जाएगी। इससे शहर की तरफ संगम नोज और उससे लगे तटों, मार्गों पर मेला बसाने के लिए ज्यादा जगह मिल जाएगी। ड्रेजिंग के लिए पोकलैंड का प्रतिदिन का खर्च दो से तीन लाख रुपये आ रहा है। गंगा से बालू खोदकर वहीं पर भंडारित भी किया जा रहा है। इससे बीच तलहटी में जगह-जगह रेत के टीले बन गए हैं।
बारिश से गंगा में नए चैनल का काम बाधित, खोदी गई बालू बहने से दिक्कत
मानसून सक्रिय होने के साथ ही बारिश शुरू हो गई है। रविवार की शाम संगम क्षेत्र में तेज बारिश की वजह से ड्रेजिंग का काम प्रभावित हो गया। इससे मशीनों को खड़ा करना पड़ा। साथ ही पानी भरने से रेत बहकर चैनल में पटने लगी। कहा जा रहा है कि बाढ़ आने पर बालू फिर नदी में मिल जाएगी। इससे धारा बदलना आसान नहीं होगा।
साथ ही इस पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे अलग से। कहा जा रहा है कि हाल में ही शासन स्तर पर गंगा में ड्रेजिंग के लिए मना भी किया था। कहा गया गया था कि बारिश और बाढ़ आने पर बालू बह जाएगी तो इसका कोई फायदा नहीं मिल पाएगा। इसके बावजूद सिंचाई विभाग ड्रेजिंग करवा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि बालू अगर वहां से दूर रखवाई जाए तो कुछ राहत मिल सकती है। इस काम की कंसल्टेंसी के लिए आईआईटी गुवाहाटी की टीम भी लगाई गई है।
छोटे-छोटे चैनलों में पाटी जाएगी खोदी गई बालू
दाहिनी तरफ कटान रोकने और धारा को संतुलित तरीके से संगम तल ले जाने के लिए ड्रेजिंग कराई जा रही है। जो बालू निकाली गई है उसे अब दूसरे कटान वाले हिस्सों या फिर छोटी-छोटी धाराओं में पाट दिया जाएगा। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता दिनेश त्रिपाठी के मुताबिक इससे दूसरे चैनल बंद भी हो जाएंगे और बालू वहां से हट जाएगी।