आईआईटी के अध्ययन के मुताबिक, यह महाकुंभ श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन की सीख भी दे रहा है। 56 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इसे मानव इतिहास का सबसे बड़ा धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजन बना दिया है।
विशेष स्नान पर्वों में सबसे अधिक आठ करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या के दिन त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान किया था। मकर संक्रांति पर 3.5 करोड़ वसंत पंचमी पर 2.57 करोड़ और माघी पूर्णिमा के दिन भी दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया था।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बंगलूरू के एक अध्ययन के अनुसार करीब दो दशक पहले 2001 में प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले में पांच करोड़ संत-भक्त शामिल हुए थे। यह संख्या 2013 में बढ़कर 12 करोड़ हो गई थी।
पिछले तीन कुंभ मेलों का क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
2025 -4,000
2001 -1,495
2013 -1,537
इतिहास में इतने बड़े मानव समागम का विश्व भर में कहीं कोई रिकॉर्ड नहीं है। सौ वर्षों के महाकुंभ और ऐसे तमाम बड़े वैश्विक आयोजनों की तुलना में भी यह सबसे बड़ा है। महाकुंभ के बाद मानव समागम और भीड़ प्रबंधन से जुड़ी यह रिपोर्ट शासन को देंगे। - प्रो. मणींद्र अग्रवाल, निदेशक-आईआईटी कानपुर