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Mahakumbh : ट्रेन में भीड़, सड़क है जाम, बिहार से नाव चलाकर प्रयागराज महाकुंभ पहुंचे आठ दोस्त

Thu, 20 Feb 2025 12:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

महाकुंभ आने वालों में यह अनूठे यात्री हैं। इस दौरान तीन रात और दो दिन नाव में ही बीतना पड़ा। प्रयागराज में डुबकी लगाने के बाद सभी बक्सर लौट गए। इंस्टाग्राम पर इनका वीडियो लगातार वायरल हो रहा है। अभी तक उनका वीडियो 83 लाख से भी अधिक लोग देख चुके हैं।
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बिहार से नाव चलाकर महाकुंभ पहुंचे आठ दोस्त। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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त्रिवेणी में डुबकी लगाने की चाह में दुनिया भर से करोड़ों लोगों के प्रयागराज पहुंचने का सिलसिला जारी है। लेकिन, सबसे अधिक चर्चा बक्सर के उन आठ दुस्साहसिक नाविकों की है, जिन्होंने भीड़ से बचने को करीब 413 किलोमीटर का सफर नाव के सहारे तय कर डाला।

महाकुंभ आने वालों में यह अनूठे यात्री हैं। इस दौरान तीन रात और दो दिन नाव में ही बीतना पड़ा। प्रयागराज में डुबकी लगाने के बाद सभी बक्सर लौट गए। इंस्टाग्राम पर इनका वीडियो लगातार वायरल हो रहा है। अभी तक उनका वीडियो 83 लाख से भी अधिक लोग देख चुके हैं।

मूल रूप से बलिया के कोटवा नारायणपुर निवासी मन्नु चौधरी पेशे से मछली पकड़ने का काम करते हैं। उन्होंने बताया वह बक्सर (बिहार) अपने ननिहाल गए थे। उनके ममेरे भाई सुमंत चौधरी ने प्रयागराज चलने की बात कही लेकिन, भीड़ और जाम की वजह से सुमंत ने नाव से चलने का प्लान बनाया। सुमंत एवं मन्नु के साथ संदीप यादव, सुखदेव चौधरी, रमेश चौधरी, रविंद्र चौधरी, पदम चौधरी एवं अशोक यादव भी चलने को राजी हो गए।

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सुमंत के पास इंजन वाली नाव थी लेकिन, इतनी दूर के सफर को देखते हुए उन लोगों ने पटना से 34 हजार रुपये का दूसरा इंजन खरीदा। बीस रुपये हजार रास्ते के खर्च के लिए रख लिए। आठ दोस्त नाव में ही अनाज, गैस चूल्हा, बर्तन समेत पेट्रोल से भरा गैलन लाद कर निकल पड़े। मन्नु के मुताबिक वह लोग 11 फरवरी की सुबह दस बजे बक्सर के कमहरिया गांव से रवाना हुए। नाविक होने की वजह से नाव चलना मुश्किल नहीं था।

वह लोग बारी-बारी से नाव चलाते थे। रात मेंं सभी मिलकर खाना बनाने थे। नाव में ही आराम करते थे। 13 फरवरी की सुबह वह लोग बनारस पहुंचे। बनारस में उन्होंने ईंधन भरा। कुछ देर ठहरकर यहां से प्रयागराज रवाना हुए। 13 फरवरी की रात करीब 12 बजे वह लोग प्रयागराज पहुंचे। पहला पीपा पुल मिलने पर आगे जाने का रास्ता नहीं था। उन्होंने वहींं अपनी नाव बांध दी।

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इसके बाद करीब दस किलोमीटर पैदल चलकर वे लोग संगम पहुंचे। वहां से मन्नु ने अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल से वीडियो पोस्ट किया। स्नान के बाद सभी नाव से बक्सर लौट आए। मन्नु के मुताबिक उन्होंने जो हिसाब लगाया उसके मुताबिक करीब 413 किलोमीटर सफर उनको नदी में सफर करना पड़ा।

नदी में इतना लंबा सफर करना काफी खतरनाक

मन्नू चौधरी का कहना है कि नदी में इतना लंबा सफर तय करना काफी खतरनाक है। वह लोग सफर के दौरान दो बार रास्ता भी भटके। नदी की दो धार होने की वजह से भटककर दूसरी तरफ पहुंच गए। किसी तरह वापस सही दिशा की ओर आए। रास्ते में मोबाइल भी स्विच ऑफ हो गया था। बक्सर से प्रयागराज के ऊपर होने की वजह से नाव की रफ्तार भी बेहद कम थी। उनका कहना है कि उन लोगों के लौटने के बाद कई नाविकों ने बक्सर से प्रयागराज जाने के लिए यात्रियों की बुकिंग कर ली लेकिन, पुलिस अब कोई नाव जाने नहीं दे रही है।

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