अर्जेंटीना से आये सुदामा कीर्तन ग्रुप ने भी अपनी अद्भुत प्रस्तुतियां दीं। अर्जेंटीना के इस कीर्तन ग्रुप ने न केवल अपने देश की संस्कृति को भारतीय संस्कृति से जोड़ा, बल्कि भारतीय भक्ति संगीत को अपनी विशेष शैली में प्रस्तुत किया। उनका कीर्तन सुनने से ऐसा प्रतीत हुआ जैसे वे पूरी दुनिया को एक साथ एक दिव्य और आत्मिक अनुभव में सहभागी बना रहे थे। अर्जेंटीना के कलाकारों के साथ भारतीय और अन्य देशों के भक्तों ने मिलकर इस भक्ति संगीत का आनंद लिया, जो एकता और सद्भाव का प्रतीक था।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आज का यह सांस्कृतिक महोत्सव विविधता में एकता का प्रतीक है, यह एकजुटता, प्रेम और भाईचारे का संदेश पूरे विश्व को दे रहा है। इन प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि जब विभिन्न देशों के लोग एक साथ मिलकर भक्ति में लीन होते हैं, तो इसका प्रभाव ना केवल उनके जीवन पर, बल्कि पूरे संसार पर पड़ता है। डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि कीर्तन वह संगीत है जो न केवल हमारे कानों को बल्कि हमारी आत्मा को भी तृप्त करता है। प्रभु नाम जीवन के हर संघर्ष में शांति का मार्ग दिखाता है।