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Mahakumbh 2025: नागा साधु मानते हैं वो ईश्वर से एक वादा करके पृथ्वी पर आए हैं, पढ़ें कुछ रहस्यमयी बातें

Thu, 16 Jan 2025 07:18 AM IST
आकाश दुबे विक्रांत चतुर्वेदी, अमर उजाला, महाकुंभ नगर

सार

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ चल रहा है। पहला अमृत स्नान हो चुका है। इस दौरान करीब पांच करोड़ से ज्यादा साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने स्नान किया। हमेशा से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे नागा संन्यासी इस बार भी जिज्ञासा बनी हुई है। आइए जानते हैं इनकी दिनचर्या के बारे में...
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महाकुंभ 2025 - फोटो : अमर उजाला
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अजीब है बहुत अजीब

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ना ही आज तक ये
रहस्य कोई समझ पाया
क्या होता है आत्मा का?
जल जाती है जब ये काया...


नागा का मतलब होता है नग्न। नागा संन्यासी पूरा जीवन नग्न अवस्था में ही रहते हैं और वह अपने आपको भगवान शिव का दूत मानते हैं। नख से शिखा तक भभूत। जटाजूट की वेणी, आंखों में सूरमा, हाथों में चिमटा, होठों पर शिव का नाम। दिगंबर, हाथ में डमरू, त्रिशूल और कमंडल के साथ ही अवधूत की धुन में दिखने वाले, इन्हें कुंभ मेले का सबसे बड़ा आकर्षण कहा जाए तो गलत नहीं होगा। सामान्य व्यक्ति इन्हें ज्यादातर कुंभ में ही देख पाता है। ये हमेशा रहस्य से भरे हुए दिखते हैं और लोग इनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहते हैं। आज हम आपको एक नागा बाबा की दिनचर्या कैसी होती है इसकी जानकारी देने वाले हैं। मैं भी इनकी खोज में टेंट की दुनिया कहे जाने वाले महांकुभ में पहुंच गया। बताया गया कि मेले में इनका एक अलग ही स्थान निर्धारित है, जहां पर वह रहते हैं और सभी अमृत स्नान का जब तक हिस्सा नहीं बन जाते तब तक वो वहीं अपना समय व्यतीत करते हैं।

Mahakumbh 2025 - फोटो : अमर उजाला
जैसे ही मैं उस जगह की ओर बढ़ा तो देखा छोटे-छोटे टेंट लगे हुए है। टेंट के बीच में एक हवनकुंड और उसमें जलती आग, कुछ नागा साधु इसमें लगातार आहुति डाल रहे होते हैं और उनके कुछ अनुयायी उनके पास बैठे हुए होते हैं। मैं उनके टेंट की संकरी दुनिया के अंदर अब आ चुका था। मन में थोड़ा भय भी था क्योंकि वो हर किसी से बात नहीं करते और उनके क्रोधित होने का कोई भी कारण हो सकता है जो आपकी समझ से परे भी हो सकता है। हालांकि भोलेनाथ की कृपा से कुछ नागा साधुओं ने मुझे उनसे बात करने की अनुमति प्रदान की और मैं अपने मन में उठने वाले रहस्यों के बारे में उनसे पूछ पाया। मेरी पहली मुलाकात बाबा नागराज गिरी से हुई उन्होंने अपनी बातों को सामने तो रखा लेकिन बहुत से रहस्य बताने से बचते दिखे। मैंने जब उनसे पूछा तो कि आपकी दिनचर्या कैसी होती है तो उन्होंने कहा कि हमारा किसी चीज का कोई ठिकाना नहीं। जब जैसा मन करता है हम वैसा करते हैं और प्रभु की भक्ति में लीन रहते हैं। उनका मानना है कि अब हम भगवान को याद नहीं करते, अब ईश्वर उन्हें याद करते हैं और किसी भी रूप में दर्शन दे सकते हैं। प्रभु की कृपा से मेरा नाम हो रहा है। हम ऊपर वाले से कुछ वादा करके धरती पर आए हैं, उस वादे को हम निभा रहे हैं।

Mahakumbh 2025 - फोटो : अमर उजाला
खुले आसमान में सूर्य की रोशनी में ही नागा करते स्नान... पढ़ें दिनचर्या
उनका आशीर्वाद लेने के बाद हम टेंट की दुनिया के और अंदर चले गए, वहां हमारी एक और नागा साधु से मुलाकात हुई। उन्होंने अपना नाम गोपाल गिरी महाराज बताया। उन्होंने बताया कि वह शंभू पंच दशनाक अखाड़े से संबंध रखते हैं। बाबा से पहला मेरा सवाल यही था कि आखिर आपका दिन कैसे व्यतीत होता है और इस दौरान आप क्या-क्या करते हैं? बाबा ने बताया कि उनकी सुबह 3 बजे होती है। वह दैनिक क्रियाओं के बाद धूनी रमाते हैं। इसके बाद वह सूर्य स्नान करते हैं। उन्होंने बताया कि सूर्य स्नान का मतलब होता है कि वो किसी भी ऐसी जगह पर स्नान नहीं करते जहां ऊपर कुछ हो। खुले आसमान में सूर्य की रोशनी के नीचे ही उनका स्नान होता है। सुबह करीब 9 बजे बाल ईश्वर के सामने बाल भोग लगाते हैं। इसके बाद अगर खाने को कुछ मिल गया तो खा लिया नहीं मिला तो नहीं खाया। अगर खाते हैं तो इस बात का ध्यान रखते हैं कि इतना न खा लें कि ध्यान लगाते समय या प्रभु को याद करते समय उन्हें नींद आ जाए। दोपहर के बाद एक बार फिर प्रभू की आराधना में लग जाते हैं, जब तक शरीर साथ देता है आराधना चलती रहती है। इसके बाद अगली सुबह से फिर वही प्रक्रिया। 
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Mahakumbh 2025 - फोटो : अमर उजाला
नागा साधु बिस्तर पर नहीं सोते
मेरा अगला सवाल था आप लोगों की कुटिया में बिस्तर नजर नहीं आता। इस पर उनका कहना था कि नागा साधु बिस्तर पर नहीं सोते। हमने सारी सुविधाओं का त्याग कर दिया है। अब हमारा जो अखाड़ा है यही हमारे लिए सबकुछ है। अब जीना प्रभु के लिए और मरना प्रभु के लिए। मैंने उनसे पूछा कि किसी के नागा बनने की प्रक्रिया क्या होती है? उनका कहना था कि अलग- अलग अखाड़ों की प्रक्रिया अगल होती है। इसके बाद उनका कहना था कि यह इतना आसान नहीं है, पूरी प्रक्रिया में दशकों का भी समय लग सकता है। इसके बाद सब गुरु की इच्छा पर निर्भर करता है।
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