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Mahakumbh 2025: मेला प्रशासन का दावा...बार्क और इसरो की मदद से साफ हो रहा गंगा जल, खर्च हुए 1600 करोड़

Tue, 25 Feb 2025 03:30 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महाकुंभ नगर

सार

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ओसीईएमएस के अलावा थर्ड पार्टी एमएनआईटी के माध्यम से रोजाना गंगा जल की जांच कराई जाती है। हर स्तर पर जल एनजीटी के मानक के अनुरूप पाए गए हैं।
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महाकुंभ मेला क्षेत्र में संगम स्नान करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेला प्रशासन का दावा है कि महाकुंभ क्षेत्र से निकलने वाले हर तरह के गंदे पानी को शोधन के बाद ही गंगा में छोड़ा रहा है। फीकल और कचरे के ट्रीटमेंट में 1600 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। अफसरों का कहना है कि विभिन्न एजेंसियों की ओर से गंगाजल की जांच भी की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार यह मानक के अनुरूप है।

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मेला क्षेत्र में बनाए गए 1.45 लाख शौचालय 
अफसरों का दावा है कि मेला क्षेत्र को खुले में शौचमुक्त रखने के लिए 1.45 लाख शौचालय बनाए गए हैं। साथ ही फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए गए हैं। जल निगम नगरीय के सहायक अभियंता प्रफुल्ल कुमार सिंह ने बताया कि मेला क्षेत्र में तीन स्थानों सेक्टर-10, 15 और 16 में 4.76 करोड़ की लागत से 0.5 मीलियन लीटर पर डे (एमएलडी) के अस्थायी एसटीपी स्थापित किए गए हैं।

बार्क और इसरो कर रहा मदद
भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) और इसरो की ओर से विकसित हाईब्रिड ग्रेन्युलर सीक्वेंसिंग बैच रिएक्टर (एचजीएसबीआर) की मदद से कचरे एवं मल का शोधन किया जा रहा है। नैनी, झूंसी और सलोरी में प्री-फैब्रिकेटेड सीवजे ट्रीटमेंट (एफएसटीपी) से गंदे पानी का शोधन किया जा रहा है।

 काफी जटिल है फीकल स्लज का ट्रीटमेंट
बार्क के डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी के प्रतिनिधि अरुण कुमार ने बताया कि फीकल स्लज का ट्रीटमेंट काफी जटिल है। सामान्य तौर पर फीकल स्लज को एसटीपी में सीधे भेज दिया जाता। वहां शोधन होता है। लेकिन, नई तकनीकी में ऐसा नहीं किया गया। एचजीएसबीआर तकनीकी में बैक्टीरिया व ओजोन के माध्यम से कई स्तर पर शोधित किया जाता है। इस तरह से शोधन के बाद पानी प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के मानक के अनुरूप पाया गया।

बनाए गए हैं 75 तालाब 
जल निगम के सहायक अभियंता ने बताया कि मेला क्षेत्र में नहाने, कपड़े व बर्तन धोने आदि कार्यों से निकलने वाले पानी को भी सीधे नदी में नहीं जाने दिया जा रहा है। मेला क्षेत्र में 75 तालाब बनाए गए हैं। वहां बायो रेमेडिएशन के माध्यम से ट्रीटमेंट के बाद पानी नदियों में छोड़ा जाता है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ओसीईएमएस के अलावा थर्ड पार्टी एमएनआईटी के माध्यम से रोजाना गंगा जल की जांच कराई जाती है। हर स्तर पर जल एनजीटी के मानक के अनुरूप पाए गए हैं।
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आबोहवा भी अच्छी होने का दावा
महाकुंभ में 63 करोड़ से अधिक लोग स्नान कर चुके हैं। इतनी भीड़ आने के बाद भी शहर की हवा गुणवत्ता के अनुरूप रही। मेला प्रशासन का दावा है कि इस दौरान प्रयागराज की हवा चंडीगढ़ से अच्छी रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण कंसल्टेंट शहीक शिराज के अनुसार महाकुंभ ग्रीन जोन में है। उन्होंने बताया कि 100 के भीतर एयर क्वालिटी इंडेक्स अच्छा माना जाता है। सिर्फ मौनी अमावस्या के दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स 106 रहा। अन्य दिनों में यह 100 से काफी नीचे रहा। इस तरह से सिर्फ मौनी अमावस्या के दिन ही वायु की गुणवत्ता कुछ खराब थी। वहीं, नगर निगम के अवर अभियंता राम सक्सेना ने बताया कि वायु प्रदूषण से बचाव के लिए 9600 कर्मचारी लगाए गए हैं। 800 कर्मचारी लगातार सक्रिय हैं। वाटर स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव किया जा रहा है। जल निगम से आठ बड़े व चार छोटे टैंकर लिए गए हैं।

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