बोट क्लब तथा किला घाट से संगम स्थल के नावें भी चलेंगी। यानि, नाव से संगम स्थल पर स्नान कर सकेंगे। महाकुंभ की तुलना में भीड़ भी काफी कम हो जाएगी। ऐसे में अपने वाहन से संगम घाट स्थित पार्किंग तक भी जा सकेंगे। हालांकि आकर्षण पंडाल, प्रदर्शनियां, हॉट एयर बैलून, हेलीकॉप्टर सेवा आदि आकर्षण नहीं रहेंगे।
प्रयागराज भी बना बड़ा धार्मिक पर्यटन स्थल
अफसरों का कहना है कि काशी एवं अयोध्या की तरह प्रयागराज भी एक बड़े धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में ऊभर कर आया है। ऐसे में अब वर्ष पर्यंत संगम क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के आने की उम्मीद है। काशी एवं अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों के टूर पैकेज में भी यह शामिल होगा।
मेला अवधि के विस्तार में हैं अड़चनें
मेला अवधि के विस्तार में कई तरह की अड़चनें हैं। अफसरों तथा जानकारों का कहना है कि महाकुंभ या कुंभ का आयोजन की अवधि निश्चित है। यह पौष पूर्णिया या मकर संक्रांति में जो पहले पड़ जाए उससे शुरू होकर महाशिवरात्रि तक चलता है। ऐसे में इसका विस्तार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा मेले की बसावट, सुविधाओं आदि के लिए सेना समेत अन्य संबंधित पक्षों से करार भी हुआ है। मेला अविध बढ़ाने के लिए सभी के साथ नए सिरे से वही प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी। इसके अलावा आयोजन से पहले मेला प्रशासन ने राष्ट्रीय हरित अभिकरण (एनजीटी) को लिखकर दिया गया है कि आयोजन की समाप्ति यानि, शिवरात्रि के बाद 15 दिनाें के भीतर सभी तक के अस्थाई बसावट हटा लिए जाएंगे।
मेला अवधि में किसी तरह का विस्तार नहीं होने जा रहा। पंडाल, टेंट, जेटी आदि निर्धारित तारीख के बाद हटा लिए जाएंगे। संगम क्षेत्र में वर्ष पर्यंत सुविधाएं रहती हैं। वह सभी रहेंगी। इस बार महाकुंभ के बाद भी बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने की उम्मीद है। ऐसे में जरूरत के अनुसार जरूरी सुविधाओं में विस्तार किया जाएगा। - विजय किरन आनंद, मेलाधिकारी