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महाकुंभ 2025 : कलश के आकार में बनेगा डिजिटल कुंभ म्यूजियम, डिजाइन तैयार

Fri, 03 Nov 2023 01:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इस तीन मंजिला कलश रूपी टॉवर में देश-दुनिया के पर्यटकों को एक ही छत के नीचे भारतीय संस्कृति, आध्यात्म और जीवन दर्शन से परिचित कराया जाएगा। अपने तरह के देश के इस पहले म्यूजियम की स्थापना के लिए उच्च स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
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डिजिटल कुंभ। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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महाकुंभ-2025 की बड़ी परियोजनाओं में शुमार डिजिटल कुंभ म्यूजियम पर काम शुरू हो गया है। हाल में ही मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र मेले की परियोजनाओं की समीक्षा के दौरे पर आए थे। उन्होंने कुंभ म्यूजियम के स्वरूप पर अफसरों के साथ मंथन किया था। इसी के साथ वास्तुविदों ने डिजाइन तैयार कर ली है। संगम के सामने अरैल में कलश के आकार में कुंभ म्यूजियम का टॉवर देश-दुनिया के लिए यादगार बनेगा।

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इस तीन मंजिला कलश रूपी टॉवर में देश-दुनिया के पर्यटकों को एक ही छत के नीचे भारतीय संस्कृति, आध्यात्म और जीवन दर्शन से परिचित कराया जाएगा। अपने तरह के देश के इस पहले म्यूजियम की स्थापना के लिए उच्च स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं। प्रयागराज के सांस्कृतिक वैभव को विश्व पटल पर उभारने के लिए संगमनगरी में कुंभ की सांस्कृतिक-आध्यात्मिक परंपरा को डिजिटल कुंभ म्यूजियम के माध्यम से संरक्षित किया जाएगा।

भूमि और लागत को लेकर सहमति न बन पाने की वजह से यह परियोजना वर्ष-2019 में ठंडे बस्ते में चली गई थी, लेकिन अब इसे साकार करने की दिशा मेंं काम शुरू हो गया है। योजना के बजट को संशोधित किया जा सकता है। पहले इसके लिए 283.63 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन तब योजना की लागत से तीन सौ करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। अफसरों के मुताबिक देश का यह पहला डिजिटल कुंभ म्यूजियम होगा, जिसमें भारतीय संस्कृति के दर्शन हो सकेंगे।
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इस योजना के तहत देश की सांस्कृतिक व ऐतिहासिक धरोहरों के डेटा को डिजिटल फॉर्मेट में संरक्षित किया जाएगा। इस म्यूजियम में प्रयागराज में संगम स्नान के साथ ही अक्षयवट, द्वादश माधव, भरद्वाज मुनि आश्रम, दुर्वासा आश्रम, शृंगवेरपुर धाम, रामवन गमन मार्ग के दर्शन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भारतीय संस्कृति की गौरव गाथा को डिजिटल फॉर्मेट में प्रदर्शित किया जाएगा। इस म्यूजियम में महापुरुषों की प्रतिमाओं के अलावा भारतीय कला-संस्कृति के विविध रूपों के साथ ही संगम के वैज्ञानिक तथ्यों से भी लोगों को परिचित कराया जा सकेगा।

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