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Mahakumbh 2025: उस पल से कुछ समय पहले जब त्रिवेणी घाट आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक बनेगा, कैसा है घाट का नजारा

सार

Triveni Sangam: त्रिवेणी संगम में मंत्रों के उच्चारण कान में एक अजीब सी मिठास को घोल रहे हैं। हवा में एक बैचनी और आस्था की सुगंध है कि आखिर वो पल कब आएगा, जिसका 12 वर्षों से इंतजार किया जा रहा है। 
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Mahakumbh 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ॐ में ही आस्था हैं, ॐ में ही विश्वास हैं,
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ॐ में ही शक्ति हैं, ॐ में ही संसार,
ॐ से होती हैं अच्छे दिन की शुरूआत...

सच में एक बहुत ही अच्छे दिन की शुरूआत होने वाली है। इस समय त्रिवेणी संगम कुछ अनाउसमेंट की आवाजों के साथ एक खामोशी की चादर ओड़े हुए उस समय की ओर बढ़ रहा है जिसका सभी को इंतजार है। ठंड और कोहरा इस माहौल को और भी शानदार बना रहे हैं। खामोशी ऐसी लग रही है जैसे पहली किरण के साथ पता नहीं क्या होने वाला है। मंत्रों के उच्चारण कान में एक अजीब सी मिठास को घोल रहे हैं। हवा में एक बैचनी और आस्था की सुगंध है कि आखिर वो पल कब आएगा, जिसका 12 वर्षों से इंतजार किया जा रहा है। फुहाल मिट्टी की सांसों को कुछ समय के लिए दबाए हुए है ताकि फिसलन न हो।

Mahakumbh 2025 - फोटो : अमर उजाला
घाट के किनारे लेटे लोगों के लिए पन्नियां सर्दी से लड़ रही है। उनके इस संघर्ष को हवा थोड़ा कमजोर कर देती है पर पकड़ बनी हुई है। कुछ चहरे बीच-बीच में अपने चेहरे से चादर को हटा कर आस-पास से गुजरने वाले लोगों को देख लेते हैं। कुछ निगाहों में इस इंतजार के खत्म होने और उस शुभ घड़ी का हिस्सा बनने की बैचेनी है। घाट पर इस समय हजारों की संख्या में आपका सामना ऐसी ही आंखों से होता है। इसी बीच चाय-चाय की आवाजें हैं, जो ऐसा प्रतीत करा रही है जैसे आपकी इस आस्था के सफर के हम भी साथी हैं।

आखों को थोड़ा ऊपर उठाओ तो लाइटों की एक दुनिया सी नजर आती है, मानों चिल्लाकर सूर्य को चुनौती देने को तैयार हों। गंगा में इनके प्रतिबिंब को देखो तो ऐसा लगता है मानो सारे विश्व का कोई अपने होने का अहसास करा रहा हो। घाट के किनारे खड़ी नाव एक दूसरे से लिपटकर खड़ी हैं, मानों अपने आप को आने वाले तूफान के लिए तैयार कर रही हों। ऐसे में बीच-बीच में आने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। 
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Mahakumbh 2025 - फोटो : अमर उजाला
पुलिसवाले अपने कर्तव्य को निभाते और लोगों को घाट से दूर करते नजर आ रहे हैं। उन्हें इस बात का अहसास है कि चंद घंटों में होने वाले इस महापर्व को सावधानी से निपटाना है। लोगों की सुबसुबाहट में कई प्रकार की भाषाओं का अहसास है। उनकी सुबसुबाहट इस बात का प्रतीक है कि पूरा देश उस घड़ी का इंतजार कर रहा है। हम भी उस घड़ी का इंतजार कर रहे हैं ताकि आपकी यहां न होने की कमी को पूरा किया जा सके।
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