लगाए जाएंगे 676 कैमरे
पिछली बार कुंभ 3200 हेक्टेयर में बसाया गया था। लेकिन इस बार महाकुंभ बसाने के लिए 4000 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की गई है। बेहतर भीड़ प्रबंधन के लिए इंट्रीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सिस्टम (आईट्रिपलसी) के कार्यों में भी विस्तार का प्रस्ताव किया गया है। इसमें अस्थायी सर्विलांस सिस्टम के तहत मेला क्षेत्र में 676 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। 12 एएनपीआर कैमरे भी लगाए जाएंगे। इसके साथ ही आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस आधारित उत्कृष्ट भीड़ प्रबंधन प्रणाली का प्रयोग किया जाएगा।
मेलाधिकारी ने बताया कि पार्किंग मैनेजमेंट सिस्टम के तहत 120 अस्थाई पार्किंग स्थलों को विकसित किया जा रहा है। जिसमें लगभग 720 सीसीटीवी कैमरे होंगे। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वाहन गिनने की प्रणाली की व्यवस्था भी होगी। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रमुख स्थलों पर रूट मैप लगाने का सुझाव दिया।
फायर सेफ्टी के नोडल चीफ फायर ऑफिसर ने बड़े टेंट की थ्रीडी मॉडलिंग कराते हुए आग लगने की दशा में बचाव के तरीकों की जानकारी दी। सेना का प्रतिनिधित्व कर रहे कर्नल क्यू ने मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर करने के दृष्टिगत ड्रोन के माध्यम से निरंतर निगरानी करते रहने का सुझाव दिया। पुलिस आयुक्त रमित शर्मा ने सुगम यातायात के लिए अनुभवी अफसरों से मार्गदर्शन लेने और डॉयल 112 का इंटीग्रेशन मेला कंट्रोल रूम से कराने का सुझाव दिया। अध्यक्षता अपर पुलिस महानिदेशक भानु भास्कर ने की।
पार्किंग एरिया में इमेज और वीडियो संदेश भी होंगे प्रसारित
महाकुंभ मेला क्षेत्र में 40 जगहों पर वीएमडी स्क्रीन लगाई जाएंगी। खासतौर से पार्किंग एरिया में इस स्क्रीन पर इमेज व वीडियो मैसेज प्रसारित किए जाते रहेंगे। बस स्टेशन और रेलवे स्टेशनों पर 126 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही कॉल सेंटर की क्षमता को 20 से बढ़ाकर 40 किया जाएगा। मेला क्षेत्र का गूगल मैप से इंटीग्रेशन किया जाएगा, ताकि विभिन्न स्थलों को गूगल मैप पर देखा जा सके।
श्रद्धालुओं के लिए चलाई जाएंगी एक हजार शटल बसें
महाकुंभ के दौरान देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 1000 शटल बसें चलाई जाएंगी। साथ ही इस बार 1300 से बढ़ाकर 2000 डीलक्स और महाराजा कॉटेज क्षमता की टेंट सिटी विकसित करने का लक्ष्य है। आईईआरटी के पास एक बड़ा पार्किंग स्थल भी विकसित करने की योजना है। सिविल एयरपोर्ट की क्षमता वृद्धि भी की जा रही है।