इसमें नैनी और झूंसी के बीच गंगा पर 3200 मीटर लंबा सेतु भी शामिल है। अगले माह इस परियोजना के निर्माण के लिए एजेंसी के यहां पहुंचने की उम्मीद है। शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-दो पर प्रस्तावित इनर रिंग रोड परियोजना के प्रथम चरण के लिए जिले के 45 गांवों के चार हजार किसानों की 195 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत अधिग्रहीत की गई है।
इनर रिंग रोड परियोजना में प्रभावित होने वाले किसानों के भूमि, भवनों, बगीचों, कुओं के स्वामित्व का मुआवजा जारी कर दिया गया है। रीवा रोड से जीटी रोड पर महुआरी, लवाइन कला होते हुए अंदावा के रास्ते इस रिंग रोड को आगे ले जाकर सहसों में फिर एनएच-2 से मिला दिया जाएगा।
संगमनगरी को जाम से मिलेगी निजात
प्रयागराज। इनर रिंग रोड के बन जाने से महाकुंभ के दौरान कानपुर से मध्य प्रदेश जाने वाले वाहनों को शहर में इंट्री नहीं करनी होगी। वहीं, एमपी से कानपुर या वाराणसी जाने वालों को भी इससे काफी राहत मिलेगी। बिना शहर में प्रवेश किए रिंग रोड के रास्ते निकल जाएंगे। इससे शहरियों को ट्रैफिक की समस्या से जूझना नहीं पड़ेगा। इसके अलावा कई जगह एप्रोच मार्ग बनने से जिले के ग्रामीणांचल इलाकों के लोगों को भी काफी राहत मिलेगी।
अफसरों पर निर्माण जल्द शुरू कराने का दबाव
इस परियोजना को महाकुंभ से पहले पूरा कराने का एनएचएआई पर दबाव है। सके लिए एनएचएआई के अफसरों के साथ महाकुंभ मेला प्रशासन लगातार बैठकें कर रहा है। अब टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही इसके निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। ब्यूरो
पहले चरण का तीन हिस्सों मेंं निर्माण कराया जाएगा। इसके दो भागों के लिए टेंडर कराया गया है। 20 अक्तूबर तक निर्माण आरंभ करा दिया जाएगा। - पंकज मिश्रा, परियोजना निदेशक, एनएचएआई