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Mahakumbh : मस्तिष्क की तरंगों को संतुलित करता है महाकुंभ का वातावरण, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने का दावा

Mon, 17 Mar 2025 01:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

महाकुंभ में गंगाजल को अल्कलाइन वॉटर से ज्यादा शुद्ध होने का दावा करने वाले प्रयागराज के वैज्ञानिक डॉ. अजय सोनकर ने इस महाआयोजन को लेकर यह दावा भी किया है कि तनाव और जीवनशैली संबंधी समस्याओं से डीएनए क्षतिग्रस्त हो सकता है।
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महाकुंभ में स्नान करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
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महाकुंभ सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक अद्भुत वैज्ञानिक चमत्कार भी है। एक शोध के आधार पर पद्मश्री वैज्ञानिक डॉ. अजय सोनकर ने यह दावा किया है कि महाकुंभ का वातावरण मस्तिष्क की तरंगों को संतुलित करता है।

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महाकुंभ में गंगाजल को अल्कलाइन वॉटर से ज्यादा शुद्ध होने का दावा करने वाले प्रयागराज के वैज्ञानिक डॉ. अजय सोनकर ने इस महाआयोजन को लेकर यह दावा भी किया है कि तनाव और जीवनशैली संबंधी समस्याओं से डीएनए क्षतिग्रस्त हो सकता है। महाकुंभ के सकारात्मक ऊर्जा क्षेत्र में सामूहिक साधना और वातावरण डीएनए को प्राकृतिक स्वरूप में पुनर्स्थापित कर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

करोड़ों लोगों की एक साथ उपस्थिति, शंखनाद व घंटे घंटियों की ध्वनि, गंगा जल में पवित्र स्नान सभी मिलकर एक ऐसा ऊर्जावान वातावरण बनाते हैं जो न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि शरीर और मस्तिष्क को भी गहराई से प्रभावित करता है। डॉ. सोनकर ने बताया कि अल्फा तरंगें मस्तिष्क की तरंगें होती हैं। जब महाकुंभ में करोड़ों लोगों के मस्तिष्क की अल्फा तरंगें आपस में मिलती हैं तो वे एक विशाल सामूहिक ऊर्जा क्षेत्र का निर्माण करती हैं।

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इस क्षेत्र के निकट जो भी व्यक्ति आता है, उसके मस्तिष्क पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। इससे उसकी तनाव उत्पन्न करने वाली बढ़ी हुई बीटा तरंगों की आवृत्ति कम हो जाती है। जिससे मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होने लगता है। आस्थायुक्त मनोभाव, शंखनाद और घंटियों की ध्वनि से उत्पन्न अल्फा तरंगें (6-12 हर्ट्ज) मस्तिष्क की उच्च आवृत्ति वाली बीटा तरंगों (12-30 हर्ट्ज) को नियंत्रित करती हैं, जिससे तनाव और घबराहट पूरी तरह दूर हो जाते हैं और हमें मानसिक शांति मिलती है।

महाकुंभ में मौजूद हर व्यक्ति चाहे वह आस्तिक हो या नास्तिक, वहां की अल्फा तरंगों की ऊर्जा प्रवाह का हिस्सा बनता है। वैज्ञानिक रूप से यह ब्रेन सिंक्रोनी मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। साथ ही मानसिक विकारों का उपचार करता है। महाकाुंभ में आने वाले 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है।

चिंता, अवसाद और पैनिक अटैक के मरीजों के लिए वरदान

चिंता, अवसाद और पैनिक अटैक जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए महाकुंभ का ऊर्जावान वातावरण एक प्राकृतिक चिकित्सक की तरह कार्य करता है। इससे मानसिक शांति, शक्ति और संतुलन प्राप्त होता है।
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