इस क्षेत्र के निकट जो भी व्यक्ति आता है, उसके मस्तिष्क पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। इससे उसकी तनाव उत्पन्न करने वाली बढ़ी हुई बीटा तरंगों की आवृत्ति कम हो जाती है। जिससे मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होने लगता है। आस्थायुक्त मनोभाव, शंखनाद और घंटियों की ध्वनि से उत्पन्न अल्फा तरंगें (6-12 हर्ट्ज) मस्तिष्क की उच्च आवृत्ति वाली बीटा तरंगों (12-30 हर्ट्ज) को नियंत्रित करती हैं, जिससे तनाव और घबराहट पूरी तरह दूर हो जाते हैं और हमें मानसिक शांति मिलती है।
महाकुंभ में मौजूद हर व्यक्ति चाहे वह आस्तिक हो या नास्तिक, वहां की अल्फा तरंगों की ऊर्जा प्रवाह का हिस्सा बनता है। वैज्ञानिक रूप से यह ब्रेन सिंक्रोनी मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। साथ ही मानसिक विकारों का उपचार करता है। महाकाुंभ में आने वाले 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है।
चिंता, अवसाद और पैनिक अटैक के मरीजों के लिए वरदान
चिंता, अवसाद और पैनिक अटैक जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए महाकुंभ का ऊर्जावान वातावरण एक प्राकृतिक चिकित्सक की तरह कार्य करता है। इससे मानसिक शांति, शक्ति और संतुलन प्राप्त होता है।