Mahakumbh: 'हिंदू राष्ट्र बनाने की नहीं...पहचानने की जरूरत'; खास बातचीत में बेबाकी से बोले कथावाचक राजन महाराज
Thu, 20 Feb 2025 10:49 AM IST
शाहरुख खान
विनोद कुमार तिवारी, अमर उजाला, प्रयागराज
सार
कथावाचक राजन महाराज का कहना है कि भारत हिंदुओं की पुण्यभूमि है। हमारा देश हिंदू राष्ट्र का प्रतीक है। हिंदू राष्ट्र बनेगा क्या, हिंदू राष्ट्र तो पहले से ही है। जरूरत है हमें समाज को जगाने की।
भारत में पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण तक सनातनी चिन्ह, नाम और प्रतीक हैं। जब प्राकृतिक रूप से हम सनातनी हैं तो फिर हमें हिंदू राष्ट्र बनाने की नहीं बस पहचानने की जरूरत है। यह कहना है कथावाचक राजन महाराज का।
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उनका मानना है कि हमारी संस्कृति ही हमारी ताकत है। यही हमारी अनमोल संपत्ति है, जबकि ज्ञान हमारा मार्गदर्शक है। प्रस्तुत है िवनोद कुमार तिवारी से बीते दिनों हुई बातचीत के अंश...
महाकुंभ में डुबकी लगाने को पूरी दुनिया आतुर है। इसे आप किस रूप में देखते हैं?
महाकुंभ सनातन संस्कृति का विलक्षण और अद्भुत पर्व है। भारतीय धरोहर की इस महान परंपरा को संरक्षित रखना और आने वाली पीढि़यों को इसके महत्व से अवगत कराना हमारा कर्तव्य है। पूरे विश्व में कोई भी देश इतना बड़ा आयोजन नहीं कर सकता। महाकुंभ लोगों की श्रद्धा और भक्ति है।
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हिंदू राष्ट्र बनाए जाने की मांग हो रही है। आपकी नजर में क्या होना चाहिए?
भारत हिंदुओं की पुण्यभूमि है। हमारा देश हिंदू राष्ट्र का प्रतीक है। हिंदू राष्ट्र बनेगा क्या, हिंदू राष्ट्र तो पहले से ही है। भारत की प्रकृति को देखिए, हिमालय, नीलगिरी, हमारे देश में जितनी नदियां हैं, उनका नाम देखें। सब हिंदू राष्ट्र की प्रकृति की गवाह है। जरूरत है हमें समाज को जगाने की।
सनातन बोर्ड की मांग हो रही है। आपकी क्या राय है?
कुंभ के माध्यम से सनातन संस्कृति की गहनता और व्यापकता को अनुभव किया जा सकता है। कहा जाता है कि यदि सनातन को जानना है तो महाकुंभ में अवश्य आना चाहिए। महाकुंभ में भारतीय संस्कृति की छटा विभिन्न रूपों में दिखती है। यही आस्था है, यहीं भक्ति है, यहीं परंपरा है और यहीं संस्कृति है।
धर्म संसद पर आपकी क्या राय है?
साधु-संतों के चिंतन में सर्वजन का हित संचित होना चाहिए। सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय का चिंतन होना चाहिए। इसी को अपनाने के लिए पूरा विश्व महाकुंभ में खिंचा चला आता है। धन्य है भारत की तीन नदियों की धारा जो प्रयाग में मिलकर पूरी दुनिया को मिलकर रहना सिखाती है।
कहा जा रहा है कि संगम स्नान को लेकर सदी का सबसे लंबा जाम हाल ही में लगा है, क्या कहेंगे आप?
लोगों में भक्ति, श्रद्धा और विश्वास है, इसलिए जाम का लोगों पर कोई असर नहीं हैं। पहले जहां दस घरों में गाड़ियां थीं, वहीं अब 100 घरों में 150 गाडि़यां हैं। अधिकतर लोग अपनी गाड़ियों से ही आते हैं। इतना बड़ा आयोजन कराना सामान्य बात नहीं है।
युवाओं और महिलाओं में धर्म का उत्साह बढ़ा है, इसके पीछे क्या वजह है?
महाकुंभ की धरती से युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए। एक साथ चलन, एक साथ स्नान करने और एक साथ भोजन सभी करते हैं। धर्म ही मनुष्य को पशु से अलग करते हैं। आहार, निद्रा, भय, मैथुन, सांसारिक सुख, मनुष्य और पशु भी करते हैं। धर्म का पालन और संरक्षण करना सभी का कर्तव्य है। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष में धर्म सबसे ऊपर होना चाहिए। हमारी युवाओं से अपील है कि अपने अंदर सकारात्मक सोच लाएं। सनातन में आस्था है तो अपने में भी आस्था आपको लानी होगी।