संगम की रेती तपस्वी साधु-संतों से गुलजार होने लगी है। इनकी साधना देख आश्चर्य भी होता है, मन में अपार श्रद्धा भी उत्पन्न होती है। सेक्टर-20 अग्नि अखाड़े में एक ऐसे ही संत आए हैं। वह पिछले 12 वर्षों से मौन धारण किए हैं। मौन होकर तपस्या करने की वजह से वह मौनी बाबा के नाम से विख्यात हो गए हैं।
अगर उन्हें किसी से कुछ कहना होता है तो वह बोर्ड पर लिख देते हैं। राजस्थान के उदयपुर से आए रामानुज पुरी महाराज अग्नि अखाड़े के नागा संन्यासी हैं।
वह देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए 12 साल से मौन व्रत का संकल्प लिए हुए हैं। शिष्यों को अपनी बात समझाने के लिए अपने पास एक डिजिटल बोर्ड व एक कलम रखे हुए हैं। जिसपर लिखकर जरूरत की चीजों को मांगते हैं।
कोई अन्य बात भी इसी के माध्यम से वह अपने शिष्यों तक पहुंचाते हैं। डिजिटल बोर्ड होने की वजह से लिखा हुआ आसानी से मिट भी जाता है। उनके शिष्य बताते हैं, पहले वह सामान्य बोर्ड पर चॉक से लिखते थे। कुछ वर्ष पहले ही उन्होंने डिजिटल बोर्ड का इस्तेमाल शुरू किया है।
उनके गुरु भाई नागा संन्यासी कन्हैया पुरी बताते हैं कि देश और विदेश में आए दिन हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है। इसी को देखते उनके गुरु भाई रामानुज पुरी महाराज 12 साल पहले देश के हिंदू राष्ट्र बनने तक मौन धारण करने का संकल्प लिए थे। इस साल उनके संकल्प का 12 साल पूरा हो गया। वह बताते हैं, जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती वह अपनी जुबान नहीं खोलेंगे।
51 घड़ों में रखे गंगाजल से तड़के स्नान करते हैं बाबा प्रमोद गिरि
सेक्टर-20 में श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़े के राजस्थान के नागा बाबा प्रमोद गिरि जी महाराज अनूठी साधना में लीन हैं। वह हर दिन तड़के 4:15 बजे मिट्टी के 51 घड़ों में रखे गंगाजल से स्नान करते हैं। शिविर में भक्त विशेष आसन पर बैठाकर उन्हें स्नान कराते हैं। उनकी यह अनूठी साधना 21 दिनों तक चलेगी।
बाबा विश्व शांति और भारत के कल्याण के लिए नौ साल से इस साधना में लीन हैं। भक्त रात में ही 51 घड़ों में गंगाजल भरकर रख देते हैं। इसके बाद बाबा तड़के स्नान करते हैं। बाबा बताते हैं, शुक्रवार को पहले दिन का स्नान हुआ।
हर अगले दिन दो और फिर तीन घड़े बढ़ते जाएंगे। साधना के आखिरी दिन घड़ों की संख्या 108 हो जाएगी। बाबा जाड़े में ठंडे जल और गर्मी में गर्म जल से नौ साल से स्नान करते आ रहे हैं।