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Research :  परमाणु विस्फोट से निकलीं प्रघाती तरंगों की तबाही थामेगा चुंबकीय आवरण, MNNIT प्रोफेसर ने तैयार किया

Thu, 18 Jul 2024 07:46 PM IST
विनोद सिंह आकाश शर्मा, अमर उजाला प्रयागराज

सार

दुनिया के शीर्ष विज्ञानियों में शुमार एमएनएनआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर गोरख नाथ ने सूक्ष्म कणों का अलग-अलग माध्यम में अध्ययन करके पाया कि परमाणु एवं बड़े विस्फोट से होने वाली क्षति को नियंत्रित करने में माइक्रो आकार के ठोस कण अहम भूमिका निभाते हैं।
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एमएनएनआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर गोरख नाथ के साथ शोधार्थी अभय मौर्य व प्रकाश उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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परमाणु विस्फोट या बम धमाकों से होने वाली तबाही को अब नियंत्रित भी किया जा सकेगा। मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में तैयार गणितीय मॉडल के मुताबिक चुंबकीय क्षेत्र और सूक्ष्म कणों का आवरण विस्फोट से निकलीं प्रघाती तरंगों से होने वाली क्षति को घटा सकता है। अमेरिकी जर्नल में प्रकाशित हो चुके इस शोध को उप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद से भी पिछले वर्ष मंजूरी मिल चुकी है।

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दुनिया के शीर्ष विज्ञानियों में शुमार एमएनएनआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर गोरख नाथ ने सूक्ष्म कणों का अलग-अलग माध्यम में अध्ययन करके पाया कि परमाणु एवं बड़े विस्फोट से होने वाली क्षति को नियंत्रित करने में माइक्रो आकार के ठोस कण अहम भूमिका निभाते हैं।

बकौल डॉ. नाथ, विस्फोट वाली जगह ठोस कणों से एक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र बनाया जा सकता है। जैसे बालू डालकर आग बुझा ली जाती है, उसी तरह विस्फोट से उत्पन्न प्रघाती तरंगें (शॉक वेव) सूक्ष्म कणों के कृत्रिम आवरण के संपर्क में आते ही कमजोर पड़ जाएंगी। इससे बड़ा नुकसान रोका जा सकेगा। इस गणितीय प्रारूप को आगे बढ़ाने का जिम्मा भौतिक विज्ञानियों का है। सूक्ष्म कणों की भूमिका पर डॉ. नाथ का शोध पत्र अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स के जर्नल फिजिक्स ऑफ फ्लूड्स में भी प्रकाशित हो चुका है।

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एमएनएनआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर गोरख नाथ के साथ शोधार्थी अभय मौर्य व प्रकाश उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला।
दो शोधार्थियों के रिसर्च पेपर प्रकाशित़

शोधार्थी प्रकाश उपाध्याय और अभय मौर्य भी डॉ. नाथ के मार्गदर्शन में प्रघाती तरंगों पर शोध कर रहे हैं। प्रकाश का शोध पत्र भौतिकी विज्ञानियों के चर्चित अंतरराष्ट्रीय जर्नल जेडएनए में फरवरी 2024 में प्रकाशित हो चुका है। वहीं, अभय का एक रिसर्च पेपर जुलाई 2023 में इंजीनियरिंग कंप्यूटेशंस जर्नल में तो दूसरा जेडएनए जर्नल के अक्तूबर 2023 के अंक में प्रकाशित हुआ है।

ऊंची इमारतों के ध्वस्तीकरण के भी घटा सकते हैं खतरे

गणितीय मॉडल साकार रूप लेता है तो ब्लास्ट से ऊंची इमारतों के ध्वस्तीकरण का खतरा भी घटाया जा सकेगा। बकौल डॉ. नाथ, 2022 में नोएडा में सुपरटेक ट्विन टॉवर को विस्फोट करके गिराने में करीब आठ सेकेंड लगे थे। टॉवर के 500 मीटर दायरे में रहने वाले लोगों को भी शिफ्ट करना पड़ा था। उनका प्रोजेक्ट सफल रहा तो इतने अधिक दायरे के लोगों को हटाने की नौबत नहीं आएगी।
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सुपरसोनिक लैब में भी काम कर चुके हैं डॉ. नाथ

दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत विज्ञानियों की सूची में चार बार स्थान पा चुके डॉ. गोरख नाथ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) बंगलूरू की सुपरसोनिक लैब में भी काम कर चुके हैं। वह बताते हैं कि उनका काम गणितीय प्रारूप बनाकर सूक्ष्म कणों, चुंबकीय क्षेत्र, गुरुत्व क्षेत्र व रेडियशन के असर का अध्ययन करके उसका भौतिक विज्ञान से संबंध जोड़ना है। उनके 100 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें से आठ शोध इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन (आईएयू) के जर्नल ऑक्टा एस्ट्रोनॉटिका में प्रकाशित हुए हैं। आईएयू की कॉन्फ्रेंस में नासा, इसरो जैसी बड़ी एजेंसियां भी प्रतिभाग करती हैं।
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