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Magh Mela : संगम पर बिछड़ी सात माह की परी, डुबकी से पहले रो-रो कर आंसुओं से नहाई मां

Sun, 15 Jan 2023 05:16 AM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज

सार

संगम नोज पर मकर संक्रांति स्नान के लिए उमड़े जन सैलाब के बीच शनिवार की सुबह सात माह की परी अपनी मां से बिछड़ गई। संगम की सर्कुलेटिंग एरिया में मासूम बेटी को पुआल पर रखकर मां कपड़े-झोले संभालने के दौरान भीड़ का हिस्सा बन गई।
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माघ मेले में मिली सात माह की बच्ची सिविल डिफेंस के शिविर में। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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संगम नोज पर मकर संक्रांति स्नान के लिए उमड़े जन सैलाब के बीच शनिवार की सुबह सात माह की परी अपनी मां से बिछड़ गई। संगम की सर्कुलेटिंग एरिया में मासूम बेटी को पुआल पर रखकर मां कपड़े-झोले संभालने के दौरान भीड़ का हिस्सा बन गई। उधर, पुआल पर पड़ी भीड़ के पांवों के बीच बच्ची चीखती रही, तो दूसरी ओर डुबकी से पहले परी की तलाश में रो-रो कर आंसुओं से नहाई मां का बुरा हाल हो गया।

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पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश रीवा से बूटा साकेत अपने पति मुकेश साकेत के साथ मकर संक्रांति स्नान के लिए आई थी। बूटा सुबह करीब आठ बजे संगम नोज पर गोद में सात माह की अपनी परी को लेकर पहुंची। वहां उसने अपने झोले, पड़े पुआल पर रखे। साथ में वहीं पर अपनी पुत्री को भी झोले के ही पास लिटा दिया। वह स्नान के लिए घाट पर उतरने का रास्ता तलाश रही थी कि इसी दौरान भीड़ के सैलाब के बीच बेटी और झोले से उसकी नजर हट गई। इसके बाद वह अपनी मासूम बेटी की तलाश में बदहवाश होकर इधर-उधर भटकने लगी।

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बूटा पति के साथ रो-रोकर भीड़ के बीच बेटी को ढूंढती रही। उधर, पुआल पर भीड़ के बीच पड़ी परी भी चीखती रही। भीड़ के बीच किसी ने भटकी मासूम के बारे में सिविल डिफेंस के शिविर में जानकारी दी। सिविल डिफेंस के स्टाफ आफीसर रवि शंकर द्विवेदी, ज्ञानेश्वर शर्मा, शिवम पांडेय, सुनील गुप्ता भीड़ नियंत्रण करते हुए बच्ची के पास पहुंचे और उसे उठाकर शिविर लाया गया। वहां मेला प्रशासन के भूले बिसरे शिविर से परी के बिछड़ने की सूचना प्रसारित की जाने लगी। कई बाद माइक से उसकी रोते हुए आवाज भी सुनाई गई। इसके घंटे भर बाद बूटा किसी तरह शिविर में पहुंचकर परी से मिली तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

पांच सौ से अधिक श्रद्धालु अपनों से बिछड़कर मिले
मकर संक्रांति पर संगम नोज समेत मेले के सभी पांच सेक्टर में बने स्नान घाटों पर शाम तक पांच सौ से अधिक लोग अपनों से बिछड़ गए। उन्हें भूले भटके शिविर के केंद्रीय प्रसारण कक्ष की मदद से अपनों से मिलाया जा सका।
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