नैमिषारण्य तीर्थ की महिमा सुनकर बनीं शिष्या
नैमिषारण्य में मढि़या घाट मैगलगंज के नागा बाबा मनमौजी राम पुरी ने बताया कि वर्ष 2024 में लुक्रेशिया उनसे मिली थीं। वह रोज उन्हें प्रणाम करती और कहां से हैं, इस बारे में पूछती। तब उसके साथ दूभाषिया और कुछ भारतीय मित्र भी थे। बाबा मनमौजी के मुताबिक हमने बिटिया लुक्रेशिया को नैमिषारण्य तीर्थ की महिमा सुनकर उनसे जुड़ी फिर शिष्या बन गई। यही नहीं, उसके पिता आंजलो और कई विदेशी उनके शिष्य हैं।
प्रयाग में मोक्ष और नैमिषारण्य तपोभूमि
नागा बाबा मनमौजी राम पुरी के मुताबिक प्रयागराज तीर्थों का राजा है। यहां कल्पवास, साधना करने वालों को शांति, मोक्ष की प्राप्ति होती है। हम यहां कुंभ और माघ मास, दोनों में आकर धूनी रमाते हैं। वहीं नैमिषारण्य तपोभूमि है। वहां 85 कोसा की परिक्रमा है। हनुमान गढ़ी है। व्यास गद्दी के साथ काली पीठ का भी स्थान है। गोमती नदी के तट पर स्थित नैमिषारण्य तीर्थ में चक्रतीर्थ, दधीचि कुंड के साथ पांडव किला भी है। इसी तीर्थ में दशश्वमेध घाट भी है जहां भगवान राम ने यज्ञ किया था। इसी तीर्थ की कथा सुनकर अन्य विदेशियों के साथ लुक्रेशिया और उसके पिता आंजलो उनके शिष्य बने।