माघ मेले के दूसरे महत्वपूर्ण स्नान पर्व मकर संक्रांति पर बृहस्पतिवार को पुण्यकाल में लाखों श्रद्धालुओं ने संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाई। कोहरे और जबर्दस्त ठंड के बीच फिर आस्था की जय जयकार हुई और ठंड की परवाह किए बगैर स्नानार्थियों का भोर से लेकर देर शाम तक घाटों की ओर से स्नानार्थियों का जुटना जारी रहा।
संक्रांति का पुण्यकाल बुधवार आधी रात से लगने के कारण स्नान का क्रम भोर से ही शुरू हो गया था। सुबह संख्या कम रही लेकिन धीरे-धीरे इसमें बढ़ोतरी होती गई। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद, शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद, शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद, शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ सहित अनेक संतों ने भी पुण्यकाल में ही डुबकी लगाई। प्रशासन ने दस लाख स्नानार्थियों के जुटने का दावा किया है।
संक्रांति स्नान पर सर्दी का असर साफ दिखा। माना जा रहा था कि बृहस्पतिवार को संक्रांति के पुण्यकाल में ज्यादा स्नानार्थी जुटेंगे लेकिन पहले दिन की अपेक्षा यह संख्या कम रही। यमुना पट्टी से लेकर संगम और गंगा पट्टी में कल्पवासियों संग देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। स्नान के बाद पहले जल में ही अर्घ्य, फिर घाट किनारे पूजा अर्चना और फिर घाटियों के यहां तिलक चंदन लगवाने के बाद श्रद्धालुओं ने तिल, गुड़, अक्षत आदि का दान किया। अनेक श्रद्धालुओं ने कंबल सहित कपड़े और खिचड़ी प्रसाद का भी दान किया।
यमुना पट्टी से लेकर संगम तक स्नानार्थियों का मुख्य जमावड़ा रहा लेकिन संगम नोज और संगम माउथ पर ज्यादा जुटे। स्नान के बाद रेती पर बैठकर लाई गुड, चना, लड्डू या हलवा पूड़ी का प्रसाद लिया। मंगलगीत गाते हुए महिलाओं की टोली घरों की ओर लौटी। वापसी में श्रद्धालु अपने साथ रेती का प्रसाद ले जाना नहीं भूले। पर्व पर पूरे मेला क्षेत्र में खासी चहल-पहल रही।