Prayagraj Magh Mela : फिल्म अभिनेता और हास्य कलाकार राजपाल यादव बुधवार को प्रयागराज माघ मेले में पहुंचे। उन्होंने संगम में डुबकी लगाई और देव प्रभाकर शास्त्री दद्दाजी के शिविर में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और पूजन किया। राजपाल ने कहा कि उनके जीवन में आज जो भी आचरण, व्यवहार और संस्कार है वह दद्दाजी की ही देन है।
गुरु देव प्रभाकर शास्त्री दद्दाजी के शिविर में पहुंचे सिने कलाकार राजपाल यादव ने कहा कि सनातन से समरसता की सीख मिलती है। संगम की रेती पर जब आता हूं नई ऊर्जा मिलती है फिर कर्म क्षेत्र में नए उत्साह से जुट जाता हूं। कभी महाकुंभ, अर्धकुंभ और हर साल माघ मेला विभिन्न संस्कृतियों का भी संगम है। यहां हमें कल्चर, जलचर और नवचर का संगम मिलता है, यही जीवन है। हमारा मानना है कि जीवन अच्छा जीना चाहिए।
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राजपाल ने कहा कि गुरु दद्दाजी ने तो हमारा जीवन बदल दिया। दद्दा के धाम या संगम की रेती में स्थापित शिविर में ही शांति मिलती है। डॉ. अनिल प्रभाकर शास्त्री के सानिध्य में बोले, यहां आस्था ही नहीं, श्रद्धा की पराकाष्ठा भी है। यहां हमें समय प्रबंधन और अनुशासन का पाठ भी सीखने को मिलता है। किसी को समय प्रबंधन सीखना हो तो पक्षियों को देखें।
सूरज की पहली किरण से उठकर दाना-पानी फिर शाम होते ही घोंसलों में आ जाते हैं, इसलिए दिनचर्या नियमित होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अब एआई का युग है। इसे मिशन की तरह अपनाएंगे तो दवा बनेगा लेकिन खेल किया तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। राजपाल यादव ने सुबह संगम में डुबकी लगाई, फिर शिविर पहुंचकर पार्थिव शिवलिंग बनाकर अनुष्ठान में शामिल हुए। दोपहर करीब एक बजे कोलकाता जाने की बात कहकर शिविर से निकल गए।
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अमर उजाला से जुड़ाव को सराहा
अपने सधे अभिनय से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले राजपाल ने अमर उजाला से अपने जुड़ाव की पुरानी याद साझा की। उन्होंने कहा कि वर्ष 1990 की बात है। शाहजहांपुर में नाटक मंचन अंधेरे नगरी चौपट राजा, टका सेर भाजी टका सेर खाजा... में अभिनय किया था। दूसरे दिन सुबह एक लड़का अमर उजाला अखबार लेकर आया, मैंने देखा तो मेरी फोटो के साथ हेडिंग लगी थी, राजपाल यादव ने निभाई गोवर्धन दास की भूमिका। वह 1990 से ऐसा फोटो लगा कि हर तरफ आज तक छप ही रहा है। उन्होंने अमर उजाला को सराहते हुए कहा, यह सामाजिक सरोकारों से जुड़ा अखबार है।