फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Magh Mela :तीन घंटे तक शंकराचार्य को समझाने में उलझे रहे प्रशासन व पुलिस के अफसर, झूंसी इंस्पेक्टर ने दी तहरीर

Sun, 18 Jan 2026 07:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

Shankaracharya Dispute : मौनी अमावस्या पर रथ पर सवार होकर संगम स्नान करने जा रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को पुलिस ने रोका तो समर्थकों ने जमकर हंगामा किया।
विज्ञापन
संगम नोज पर रथ रोकने पर हुए विवाद के बाद शंकराचार्य से बात करते पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मौनी अमावस्या पर रथ पर सवार होकर संगम स्नान करने जा रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को पुलिस ने रोका तो समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। शंकराचार्य अपने रथ से घाट तक जाने के लिए अड़े रहे और पुलिस ने उन्हें 50 मीटर पहले रोककर पैदल जाने के लिए कहा। इस पर शंकराचार्य बिना स्नान किए लौट गए।

विज्ञापन


उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि सरकार के इशारे पर रोका गया है। क्योंकि, प्रदेश सरकार के मुखिया मुझसे नाराज हैं। जब महाकुंभ में भगदड़ मची थी तो मैंने उन्हें जिम्मेदार ठहराया था। वहीं, झूंसी इंस्पेक्टर ने हंगामे के बाद एफआईआर के लिए संबंधित थाने में तहरीर दी। पुलिस का कहना है कि शंकराचार्य के समर्थकों ने बैरियर भी तोड़ दिया।

अविमुक्तेश्वरानंद झूंसी स्थित अपने शिविर से रथ पर सवार होकर संगम स्नान के लिए निकले। सुबह करीब 9:30 बजे पांटून पुल नंबर-दो पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया और पैदल जाने के लिए कहा। शंकराचार्य व पुलिस अफसरों के बीच कहासुनी बढ़ी तो गुस्साए समर्थकों ने बैरियर तोड़ दिया और शंकराचार्य साधु-संतों व समर्थकों के जुलूस के साथ संगम की ओर बढ़ चले।

विज्ञापन

संगम से 50 मीटर पहले पुलिस ने फिर उन्हें रोक लिया और हंगामा शुरू हो गया। धक्कामुक्की हुई तो पुलिस ने कई समर्थकों को हिरासत में ले लिया। पुलिस की कार्रवाई से नाराज शंकराचार्य ने समर्थकों को छोड़ने के लिए कहा तो पुलिस अफसरों ने बताया कि किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है, उन्हें यहां से सिर्फ हटाया गया है। पुलिस का तर्क था कि क्षेत्र में करोड़ों श्रद्धालु आए हैं। ऐसे में घाट तक रथ जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। शंकराचार्य से आग्रह किया गया कि वह 50 मीटर की दूरी पैदल तय कर लें। शंकराचार्य नहीं माने तो उच्चाधिकारियों ने शासन में बात की।

हालांकि, थोड़ी देर बाद ही अचानक कुछ लोग आए और पुलिस की मौजूदगी में शंकराचार्य का रथ घसीटकर वापसी मार्ग की ओर मोड़ दिया। समर्थकों ने आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों ने रथ को धक्का देकर वहां से जबरन हटाया। तीन घंटे बाद दोपहर 12:30 बजे मामला शांत हुआ तो मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस आयुक्त जोगेंद्र सिंह, डीएम मनीष कुमार वर्मा, मेलाधिकारी ऋषि राज, संयुक्त पुलिस आयुक्त डॉ. अजय पाल शर्मा मेले की व्यवस्था संभालने के लिए रवाना हुए।

मेलाधिकारी ने पहले ही किया था स्पष्ट, नई परंपरा को मंजूरी नहीं

प्रयागराज। मेलाधिकारी ऋषि राज ने कुछ दिनों पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि माघ मेले में कोई नई परंपरा नहीं पड़ेगी। उन्होंने 13 जुलाई को ही एक विज्ञप्ति के माध्यम से बयान जारी किया था कि माघ मेला-2026 में किसी भी नई परंपरा को प्रारंभ न करते हुए किसी भी तरह के अमृत स्नान की अनुमति नहीं दी जाएगी। मेलाधिकारी ने कहा था कि यह कुंभ की परंपरा है, इसलिए माघ मेले में अनुमन्य नहीं होगी। 

परंपरा न टूटे, इसलिए बार-बार किया निवेदन : पुलिस आयुक्त

प्रयागराज। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र सिंह ने कहा कि मेले की परंपरा न टूटे, इसलिए शंकराचार्य से बार-बार निवेदन किया गया कि वह रथ छोड़कर पैदल जाएं पर नहीं माने। सभी साधु-संतों से पहले ही कहा जा चुका है कि सामान्य नागरिक की तरह संगम स्नान करें। मेले में कोई नई परंपरा शुरू न करें। पुलिस आयुक्त ने कहा कि शंकराचार्य रथ पर सवार होकर संगम नोज तक जाना चाहते थे, जहां महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ संगम स्नान के लिए आई थीं। भीड़ काफी ज्यादा थी और रथ पर सवार शंकराचार्य अपने 200 समर्थकों के साथ वहां पहुंचते तो भगदड़ हो सकती थी, किसी की जान भी जा सकती थी। ऐसे में उन्हें रथ के साथ संगम नोज तक जाने की अनुमति देना सुरक्षित नहीं था। समर्थकों ने पुलिस से धक्कामुक्की भी की। पुलिस ने किसी को हिरासत में नहीं लिया और शंकराचार्य के शिष्य ही उनका रथ व पालकी लेकर वापस गए। सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है। बैरियर तोड़ने में जो लोग चिह्नित किए जाएंगे, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। 

वापसी मार्ग को तीन घंटे तक रखा जाम : मंडलायुक्त

मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल का कहना है कि संगम से वापसी मार्ग को शंकराचार्य व समर्थकों ने तीन घंटे तक जाम रखा। उनसे कई बार अनुरोध किया गया कि वापसी मार्ग से हट जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को दिक्कत न हो। जिस वक्त शंकराचार्य समर्थकों के साथ संगम घाट पर जाना चाहते थे, उस वक्त संगम व आसपास काफी श्रद्धालु मौजूद थे। नियम न मानने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर होगी कार्रवाई : डीएम

डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि मेले में शनिवार रात 12 बजे से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। दोपहर 12 बजे तक तीन करोड़ श्रद्धालु आ चुके थे। प्रशासन की यही मंशा है कि श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से स्नान करके अपने गंतव्य की ओर से रवाना हों। अगर कोई परंपरा के विपरीत और बैरियर तोड़कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए संगम तट पर पहुंचा है तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। 
विज्ञापन

शाम को शिविर के सामने धरने पर बैठे शंकराचार्य

प्रयागराज। हंगामे के बाद शंकराचार्य शाम को अपने शिविर के सामने धरने पर बैठ गए। आरोप लगाया कि प्रशासन ने जानबूझकर स्नान करने से उन्हें रोका। जहां तक धक्कामुक्की और बैरियर तोड़ने की बात है तो इस बारे में उन्हें कोई नहीं जानकारी है। उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि पुलिस के बड़े-बड़े अधिकारी साधु-संतों को पीट रहे हैं। संत समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उनकी मांग है कि प्रशासन के लोग वहां आकर माफी मांगें।

पुलिस पर दुर्व्यवहार करने का लगाया आरोप

प्रयागराज। शंकराचार्य के शिष्य स्वामी वैष्णानंद, प्रकाश पारिक, रजनीश दुबे और बलराम तिवारी आदि ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया है। उन्हें धक्का देते हुए ले जाकर घंटों बेवजह बैठाए रखा गया। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें