संगम से 50 मीटर पहले पुलिस ने फिर उन्हें रोक लिया और हंगामा शुरू हो गया। धक्कामुक्की हुई तो पुलिस ने कई समर्थकों को हिरासत में ले लिया। पुलिस की कार्रवाई से नाराज शंकराचार्य ने समर्थकों को छोड़ने के लिए कहा तो पुलिस अफसरों ने बताया कि किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है, उन्हें यहां से सिर्फ हटाया गया है। पुलिस का तर्क था कि क्षेत्र में करोड़ों श्रद्धालु आए हैं। ऐसे में घाट तक रथ जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। शंकराचार्य से आग्रह किया गया कि वह 50 मीटर की दूरी पैदल तय कर लें। शंकराचार्य नहीं माने तो उच्चाधिकारियों ने शासन में बात की।
हालांकि, थोड़ी देर बाद ही अचानक कुछ लोग आए और पुलिस की मौजूदगी में शंकराचार्य का रथ घसीटकर वापसी मार्ग की ओर मोड़ दिया। समर्थकों ने आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों ने रथ को धक्का देकर वहां से जबरन हटाया। तीन घंटे बाद दोपहर 12:30 बजे मामला शांत हुआ तो मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस आयुक्त जोगेंद्र सिंह, डीएम मनीष कुमार वर्मा, मेलाधिकारी ऋषि राज, संयुक्त पुलिस आयुक्त डॉ. अजय पाल शर्मा मेले की व्यवस्था संभालने के लिए रवाना हुए।
परंपरा न टूटे, इसलिए बार-बार किया निवेदन : पुलिस आयुक्त
प्रयागराज। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र सिंह ने कहा कि मेले की परंपरा न टूटे, इसलिए शंकराचार्य से बार-बार निवेदन किया गया कि वह रथ छोड़कर पैदल जाएं पर नहीं माने। सभी साधु-संतों से पहले ही कहा जा चुका है कि सामान्य नागरिक की तरह संगम स्नान करें। मेले में कोई नई परंपरा शुरू न करें। पुलिस आयुक्त ने कहा कि शंकराचार्य रथ पर सवार होकर संगम नोज तक जाना चाहते थे, जहां महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ संगम स्नान के लिए आई थीं। भीड़ काफी ज्यादा थी और रथ पर सवार शंकराचार्य अपने 200 समर्थकों के साथ वहां पहुंचते तो भगदड़ हो सकती थी, किसी की जान भी जा सकती थी। ऐसे में उन्हें रथ के साथ संगम नोज तक जाने की अनुमति देना सुरक्षित नहीं था। समर्थकों ने पुलिस से धक्कामुक्की भी की। पुलिस ने किसी को हिरासत में नहीं लिया और शंकराचार्य के शिष्य ही उनका रथ व पालकी लेकर वापस गए। सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है। बैरियर तोड़ने में जो लोग चिह्नित किए जाएंगे, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
वापसी मार्ग को तीन घंटे तक रखा जाम : मंडलायुक्त
मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल का कहना है कि संगम से वापसी मार्ग को शंकराचार्य व समर्थकों ने तीन घंटे तक जाम रखा। उनसे कई बार अनुरोध किया गया कि वापसी मार्ग से हट जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को दिक्कत न हो। जिस वक्त शंकराचार्य समर्थकों के साथ संगम घाट पर जाना चाहते थे, उस वक्त संगम व आसपास काफी श्रद्धालु मौजूद थे। नियम न मानने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर होगी कार्रवाई : डीएम
डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि मेले में शनिवार रात 12 बजे से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। दोपहर 12 बजे तक तीन करोड़ श्रद्धालु आ चुके थे। प्रशासन की यही मंशा है कि श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से स्नान करके अपने गंतव्य की ओर से रवाना हों। अगर कोई परंपरा के विपरीत और बैरियर तोड़कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए संगम तट पर पहुंचा है तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।