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Magh Mela 2023 : रेती पर एक टेंट के नीचे चार पीढ़ियों का अनूठा कल्पवास

Sun, 08 Jan 2023 05:35 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

संगम किनारे तंबुओं की नगरी में महीने भर के जप, तप, ध्यान की संस्कृति का रंग खूब गाढ़ा हो रहा है। पौष पूर्णिमा से यज्ञशालाओं में हवन, पंडालों में सत्संग, कीर्तन और कथाओं के बीच कल्पवास के लिए हर उम्र के लोग खिंचे चले आए हैं।
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प्रयागराज में मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से संगम स्नान के लिए पहुंचीं 99 वर्षीय वृद्धा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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संगम की रेती पर शुरू हुए महीने भर के कल्पवास में इस बार संस्कृति-परंपरा और संस्कारों का अद्भुत मिलन देखने लायक है। इस बार माघ मेले में जीवन की हर लालसा पूरी कर चुके बुजुर्ग जहां मोक्ष की कामना से कल्पवास कर रहे हैं, तो वहीं दुनियादारी से दूर रहकर खेलने की उम्र में बच्चे अपनी परंपरा को जानने-समझने और आत्मसात करने के लिए। एक टेंट के नीचे चार पीढ़ियां एक साथ कल्पवास में रम गईं हैं।

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संगम किनारे तंबुओं की नगरी में महीने भर के जप, तप, ध्यान की संस्कृति का रंग खूब गाढ़ा हो रहा है। पौष पूर्णिमा से यज्ञशालाओं में हवन, पंडालों में सत्संग, कीर्तन और कथाओं के बीच कल्पवास के लिए हर उम्र के लोग खिंचे चले आए हैं। यूपी, एमपी, बिहार के अलावा अन्य राज्यों से यहां आए संतों -गृहस्थों के अपने-अपने संकल्प हैं।

मध्य प्रदेश के बैतूल जिला स्थित मुलताई गांव से 99 वर्षीया सुगा माई सिसोदिया अपने परपोते समेत चार पीढ़ियों के साथ कल्पवास कर रही हैं। सेक्टर तीन के अपने शिविर से वह सुबह से शाम तक तीन बार व्हील चेयर से संगम स्नान के लिए जाती हैं। शनिवार की सुबह कड़ाके की ठंड के बीच उन्होंने ब्रह्म मुहूर्त में डुबकी लगाई। संकल्प पूछने पर वह ऊपर ही ओर हाथ उठाकर आसमान निहारने लगती हैं।

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कहती हैं कि जीवन में सबकुछ देख लिया है। मां गंगा ने अब तक हर लालसा पूरी की है। इस बार का कल्पवास सिर्फ मोक्ष की कामना से कर रही हूं। उनके पौत्र दिनोज सिंह राजपूत, परपौत्र दिव्य राजपूत के अलावा बहू, बेटे, बेटियां भी कल्पवास के लिए आई हैं।

इसी तरह महावीर मार्ग स्थित मौनी बाबा के शिविर में अमेठी के अपनी दादी देविका तिवारी के साथ नौ वर्षीया बालिका आराध्या तिवारी भी कल्पवास के लिए आई है। अमेठी के पंडित का पुरवा रायपुर फुलवारी गांव की आराध्या की मां शालू बताती हैं कि उसे कल्पवास न करने की सलाह दी गई। कई बार मना किया गया कि वह इस ठंड में संगम पर महीने भर रहने का संकल्प न ले, लेकिन वह अपनी दादी से प्रेरणा लेकर कल्पवास के नियमों से परिचित हो रही है।
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