कहती हैं कि जीवन में सबकुछ देख लिया है। मां गंगा ने अब तक हर लालसा पूरी की है। इस बार का कल्पवास सिर्फ मोक्ष की कामना से कर रही हूं। उनके पौत्र दिनोज सिंह राजपूत, परपौत्र दिव्य राजपूत के अलावा बहू, बेटे, बेटियां भी कल्पवास के लिए आई हैं।
इसी तरह महावीर मार्ग स्थित मौनी बाबा के शिविर में अमेठी के अपनी दादी देविका तिवारी के साथ नौ वर्षीया बालिका आराध्या तिवारी भी कल्पवास के लिए आई है। अमेठी के पंडित का पुरवा रायपुर फुलवारी गांव की आराध्या की मां शालू बताती हैं कि उसे कल्पवास न करने की सलाह दी गई। कई बार मना किया गया कि वह इस ठंड में संगम पर महीने भर रहने का संकल्प न ले, लेकिन वह अपनी दादी से प्रेरणा लेकर कल्पवास के नियमों से परिचित हो रही है।