prayagraj news : माघ मेले में भूमि को लेकर असंतोष जाहिर करते संत।
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माघ मेले में समूहों में बसने वाली तीसरी बड़ी आध्यात्मिक संस्था आचार्यबाड़ा के संतों में रार छिड़ने से शुक्रवार को दिन भर की लंबी मशक्कत के बाद भी भूमि आवंटन नहीं हो सका। हालांकि मेला प्रशासन ने दोनों धड़े के संतों को एक साथ बैठाकर सहमति बनाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बन सकी। दोनों पक्षों की ओर से दो-दो संतों को नामित करने का भी सुझाव दिया गया, लेकिन इस पर भी एक राय नहीं बन पाई। अंतत: बिना भूमि आवंटन कराए ही आचार्यबाड़ा के संत अपने आश्रमों को लौट गए।
रामानुजनगर प्रबंध समिति के अध्यक्ष स्वामी रामेश्वराचार्य चाहते हैं कि उनके हाथों भूमि वितरण किया जाए, जबकि दूसरे धड़े के संतों की आपात बैठक में तय हुआ कि मेला प्रशासन ही भूमि आवंटित करे। ऐसा न होने पर मेले के बहिष्कार की चेतावनी भी दी गई।
आचार्यबाड़ा में भी घमासन मचने से शुक्रवार को भूमि आवंटन नहीं हो सका। आचार्यबाड़ा बसाने के लिए रेलवे पुल से उत्तर हरिश्चंद्र द्वितीय चौराहा के बीच दो गाटा मार्गों पर 80 बीघा भूमि आवंटित की जानी है। सुबह रामानुज नगर प्रबंध समिति की ओर से स्वामी श्रीधराचार्य, स्वामी घनश्यामाचार्य और परांकुशाचार्य और अखिल भारतीय रामानुज वैष्णव समिति आचार्य बाड़ा की ओर से अध्यक्ष अच्युतप्रपन्नाचार्य, महामंत्री कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य और चक्रपाणि महाराज भूमि की नापी कराने पहुंचे।
इससे पहले मेला प्रशासन की ओर से आचार्यबाड़ा के संतों को नक्शा मुहैया करा दिया गया था, ताकि सहमति के आधार पर भूमि बांटी जा सके। लेकिन दोनों धड़े के संतों में सहमति नहीं बन सकी। रामानुज प्रबंध समिति के संतों का कहना था कि पूरी भूमि उन्हें दे दी जाए और वह अपनी सूची के आधार पर वितरण करेंगे। लेकिन वैष्णव समिति ने इसका कड़ा विरोध किया। इस पर मेला प्रशासन की ओर से सुझाव दिया गया कि दोनों पक्षों के दो-दो संतों को नामित कर उनकी मौजूदगी में भूमि बांटी जाए, लेकिन ऐसे संतों के भी नाम नहीं दिए जा सके। ऐसे में भूमि वितरण नहीं हो सका।