खाक चौक संत समिति ने संगम से मोरी मार्ग के बीच तीन सौ बीघे भूमि आवंटन के लिए दिया प्रस्ताव
दंडी स्वामी नगर का भी होगा विस्तार, सुविधाओं पर काम सुस्त होने से संत नाराज
प्रयागराज। संगम की रेती पर माघ मेला बसने से पहले साधु-संतों ने भूमि आवंटन से लेकर सुविधाओं तक के लिए प्रशासन को घेरना शुरू कर दिया है। खाक चौक संत समिति ने इस बार अपने अखाड़ों को बसाने के लिए जहां तीन तौ बीघा जमीन की मांग की है, वहीं दंडी संन्यासियों की प्रमुख आध्यात्मिक संस्था दंडीबाड़ा ने दंडी स्वामी नगर वाले इलाके में बिजली, सड़क व अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास में सुस्ती पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि समय रहते इंतजाम पूरे कर लिए जाएं, ताकि संतों -भक्तों, कल्पवासियों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति भी इस बार अपने शिविरों का विस्तार करेगी। रिकार्ड में इस आध्यात्मिक संस्था को 70 बीघा जमीन आवंटित की जाती रही है, लेकिन इस बार दंडीबाड़ा के लिए 85 बीघे भूमि मांगी गई है। गंगा पार रेलवे पुल से उत्तर बसने वाले दंडी स्वामी नगर के लिए भूमि पूजन की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। 10 दिसंबर को मेलाधिकारी रजनीश कुमार मिश्र व अन्य अफसरों, साधु-संतों की मौजूदगी में भूमि पूजन होगा। इसके बाद सबसे पहले मेले में दंडी स्वामी नगर बसाने के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया 12 दिसंबर को आरंभ होगी।
समिति के महामंत्री दंडी स्वामी ब्रह्माश्रम बृहस्पतिवार को बतया कि इस बार दंडी स्वामी नगर के विस्तार के लिए 15 बीघा अधिक भूमि मांगी गई है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले दंडी स्वामी नगर बसाने की प्रक्रिा आरंभ होती है, लेकिन अभी तक न तो पांटून पुलों का निर्माण पूरा हो सका है, न चकर्ड प्लेट सड़कों का। बिजली-पानी की सुविधा से भी ऐसे क्षेत्रों को अभी तक नहीं जोड़ा जा सका। यही हाल रहा तो संतों-भक्तों के परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उधर, खाक चौक संत समिति ने भी 30 बीघा अधिक भूमि आवंटित करने की मांग की है। इस बार तीन सौ बीघे में खाक चौक बसाया जाएगा। खाक चौक संत समिति के महामंत्री महामंडेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा ने बताया कि उन्होंने डीएम मेलाधिकारी से मिलकर वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया है। खाक चौक के आसपास दलदल भूमि स्वीकार नहीं की जाएगी। सतुआ बाबा ने भी समय रहते संतों-भक्तों के शिविरों के लिए सुविधाओं पर काम पूरा करने के लिए आवाज उठाई है।