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पूरे हुए मनोरथ, फिर अउबै गंगा मइया

Tue, 03 Feb 2015 11:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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माघ मेले  के अंतिम स्नानपर्व  माघी पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने संगम समेत गंगा के तटों पर पुण्य की डुबकी लगाई और इसी के साथ माघ मास पर्यंत गंगा स्नान का संकल्प पूरा हुआ। कल्पवासी संगम तट से रेणुका प्रसाद लेकर घरों को लौट गए।
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सोमवार की रात 1बजकर 51 मिनट पर पूर्णिमा तिथि संचरण के साथ मेला क्षेत्र हर हर गंगे, माधव सकल काम साधो के जयघोष से गूंज उठा। कल्पवासी और संत महात्माओं ने ब्रह्ममुहूर्त में संगम सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर पुण्य की डुबकी लगाई। हालांकि उन्हें घर जाने की जल्दी थी पर पुष्य नक्षत्र व पूर्णिमा तिथि के संयोग से बने विशेष योग में  विधिविधान से पूजा अर्चना की। स्नान कर घाट छोड़ने की अपील के बावजूद श्रद्धालु गंगा मइया के पूजन में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाह रहे थे।

मां गंगा और प्रयाग के देवता भगवान माधव की पूजा अर्चना कर तीर्थ पुरोहितों को सामर्थ्य अनुसार दान किया। कल्पवास के अनुष्ठान पूरे कर श्रद्धालुओं ने घर के लिए गंगाजली, डिब्बों में गंगाजल भरा और अगले साल फिर आने का संकल्प दोहरा कर घर को प्रस्थान कर गए। माघी पूर्णिमा पर शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंध समिति के संरक्षक स्वामी महेशाश्रम, अध्यक्ष स्वामी विमलदेव आश्रम, खाक चौक व्यवस्था समिति के अध्यक्ष माधोदास आदि ने डुबकी लगाई।  
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ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्यों ने माघी पूर्णिमा पर यमुना में पुण्य की डुबकी लगाई। शंकराचार्य के शिष्य व मनकामेश्वर मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी की अगुवाई में यमुना स्नान के बाद भगवान विष्णु व उनके अवतार श्रीकृष्ण की विधिविधान से पूजा अर्चना हुई। श्रीधरानंद के अनुसार पौष पूर्णिमा गंगा, मौनी अमावस्या संगम व माघी पूर्णिमा पर यमुना स्नान विशेष पुण्यदायी है।
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