वह इसी नंबर के जरिए जेल के बाहर रहने वाले अपने गुर्र्गों के संपर्क में रहता था। यह नंबर जिस व्यक्ति के नाम पर जारी था, पुलिस ने उससे संपर्क किया तो एक अलग ही कहानी सामने आई। उसने बताया कि उसने करेली के हमजा अंसारी से सिम लिया था। लेकिन उसका यह भी कहना था कि उसका सिम उसके पास है। इसके बाद जब जांच पड़ताल आगे बढ़ी तो पता चला कि करेली की जिस दुकान से यह सिम बेचा और एक्टिवेट किया गया, वह हमजा अंसारी की है।
सूत्रों का कहना है कि करेली से पकड़े जाने के दौरान हमजा ने पुलिस व सीबीआई टीम को बताया कि उसकी दुकान पर एक व्यक्ति सिम लेने आया था। उसने उसे सिम तो दे दिया लेकिन जालसाजी करते हुए उसकी आईडी पर दो और सिम एक्टिवेट कर लिए। इन्हीं में से एक सिम अतीक अहमद को दिया गया था।
तीन साल से फरार है दो लाख का इनामी उमर
अतीक अहमद का बड़ा बेटा उमर इस समय जोन के सबसे बड़े इनामियों में से एक है। उस पर सीबीआई ने दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। 2019 में सीबीआई की ओर से मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद से ही वह फरार है। जिस पर फरवरी 2020 में इनाम घोषित किया गया था। प्रॉपर्टी डीलर मोहित जायसवाल को अगवा कर देवरिया जेल में पीटने के मामले में वह पिता अतीक समेत अन्य के साथ नामजद है।