ब्रिटिश हुकूमत ने दी थी मदरसे की इजाजत
मदरसा की ओर से पीडीए को एक सौ से अधिक पन्नों का जवाब भेजा गया है। इसकी कॉपी सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट को भी भेजी गई है। अपने जवाब में मदरसे की ओर से कहा गया है कि मस्जिद 300 साल पुरानी और मदरसा 84 साल पुराना है। इसके निर्माण की इजाजत ब्रिटिश हुकूमत ने दी थी। मदरसे के सभी निर्माण वैध हैं। सारे निर्माण प्राधिकरण और संबंधित विभागों की अनुमति के बाद किए गए हैं। मदरसे की स्थापना 1940 में की गई थी। उस समय ब्रिटिश हुकूमत से मंजूरी ली गई थी। देश आजाद होने के बाद 1952 में नगर पालिका परिषद से नक्शा पास कराया गया था। उस समय विकास प्राधिकरण का गठन नहीं किया गया था।
बरामद हुई थीं विवादास्पद पुस्तकें
पुलिस जांच में यहां पर विवादास्पद किताब बरामद हुई थीं। इसके बाद पीडीए ने भी मदरसे पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था। शुक्रवार को मदरसे के गेट पर चस्पा नोटिस में कहा गया है कि लगभग तीन हजार वर्ग मीटर के कंपाउंड के भूतल प्रथल तल पर मदरसा एवं कमरों का निर्माण किया गया है। इसलिए यह अपेक्षा की जाती है कि पीडीए कार्यालय में 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक यह बताएं कि निर्माण कंस्ट्रक्शन गिरा देने का आदेश क्यों न दिया जाए।
मदरसे को किया जा चुका है सील
अधिनियम की धारा 14 के तहत पीडीए के अनुमति के बिना निर्माण करने के लिए 50 हजार रुपये तक अर्थदंड के भागी हो सकते हैं। ऐसा अपराध करने की दशा में दोष सिद्ध होने पर 2500 रुपये तक प्रत्येक दिन के लिए अतिरिक्त जुर्माना हो सकता है। बता दें कि पीडीए की टीम ने निर्माण अनाधिकृत होने का दावा कर मदरसे को सील कर दिया था। साथ ही चस्पा नोटिस में कहा था कि जबरन प्रवेश करने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं पुलिस मदरसे के तीन बैंक खाते को फ्रीज कर दिया था।