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जनसंख्या नियंत्रण के लिए बने कानून

Sun, 21 Feb 2016 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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आजादी के बाद सनातन संस्कृति का निरंतर क्षरण हुआ है। पहले मुगलों फिर अंग्रेजों ने देश की संस्कृति को बर्बाद किया। तब भी शंकराचार्य, दंडी संन्यासियों और धर्माचार्यों ने सनातन संस्कृति को बचाए रखा। भारत की आत्मा आज भी गांवों में बसती है। गांव जागेगा तो देश जागेगा। साधु संन्यासियों को मठ मंदिरों को छोड़कर गांव-गांव अलख जगाने के लिए जाना होगा।  
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शनिवार को धर्म सम्राट स्वामी क रपात्री जी के 34वें महानिर्वाण महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह ने कहा मैं पहले सनातनी हूं, उसके बाद ही भाजपा कार्यकर्ता, सांसद और मंत्री। इसी क्रम में उन्होंने राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाये जाने की भी वकालत की। कहा, देश में एक विशेष समुदाय की जनसंख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जबकि हिंदुओं की संख्या लगातार कम हो रही है। इसीलिए जरूरी है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बने।                                                                                                    तकनीकी विश्वविद्यालय जयपुर के कुलाधिपति प्रो.बलवीर सिंह तोमर ने कहा, करपात्री जी ने धर्म और समाज के बीच सेतु का काम किया है। धर्माचार्यों को उनके रास्ते पर चलकर राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाना चाहिए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रतन लाल हांगलू ने कहा, स्वामी करपात्री जी सच्चे राष्ट्र भक्त थे। अखिल भारतीय धर्मसंघ की ओर से माघ मेला क्षेत्र त्रिवेणी मार्ग स्थित पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के शिविर में आयोजित  कार्यक्रम की अध्यक्षता सर्वेश्वर चैतन्य ब्रह्मचारी और संचालन रोहित कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम में गीताप्रेस गोरखपुर के अध्यक्ष राधेश्याम खेमका, कृष्ण कुमार खेमका, अभिषेक ब्रह्मचारी, डा.अलका राय, संदीप राय आदि उपस्थित थे।                                                           
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