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शहर में चिकनपॉक्स ने पसारे पांव

Sun, 21 Feb 2016 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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मौसम की उठापटक का असर खेती-किसानी पर ही नहीं बल्कि लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है। लोग जुकाम, बुखार, खांसी के साथ चिकनपॉक्स की चपेट में आ रहे हैं। सरकारी और निजी चिकित्सालयों की ओपीडी में इसके रोजाना दर्जनों मामले आ रहे हैं। बच्चों में यह बीमारी तेजी से फैली है। एसआरएन, बेली, कॉल्विन में इसके ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। कई मरीज त्वचा रोग विशेषज्ञ के यहां भी पहुंचकर उपचार करा रहे हैं। 
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आमतौर पर यह बीमारी अप्रैल और मई के महीने में होती थी लेकिन मौसम में उठापटक से और पारे के 30 डिग्री सेल्सियस के ऊपर जाने से फरवरी में ही लोगों को अपना निशाना बनाने लगी है। बेली अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. शक्ति बसु कहते हैं कि आमतौर पर चिकनपॉक्स के मरीज महीने में तीन-चार आते थे लेकिन हफ्ते भर से रोज एक मरीज आ रहा है। खासकर बच्चों को यह जल्दी चपेट में ले रहा है। चिल्ड्रेन अस्पताल की अध्यक्ष डॉ. अनुभा श्रीवास्तव कहती हैं कि बच्चों के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इसके चलते बच्चे इसकी गिरफ्त में जल्दी और ज्यादा आ रहे हैं।
चिकनपॉक्स के मरीजों में तेज बुखार के साथ शरीर में दाने निकल रहे हैं। शरीर में लाल चकत्ते पड़ रहे हैं। शरीर में निकलने वाले दानों में धीरे-धीरे पानी भर रहा है और यह पानी फिर पस में परिवर्तित हो रहा है। बीमारी की शुरूआत आम तौर पर पेट और पीठ से हो रही है। खतरनाक बात यह है कि यह संक्रमित बीमारी है। मरीजों को आइसोलेट (अकेले) रहने की जरूरत होती है। इसका वायरस ‘वैरीसेला जॉस्टर’ एक से दूसरे में पहुंचकर इंफेक्ट (संक्रमित) कर रहा है। एलोपैथ में इसकी कोई विशेष दवा नहीं है। 
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बीमारी से होने वाले लक्षण का उपचार किया जाता है। जैसे बुखार के लिए पैरासिटामॉल। बहुत जरूरत पड़ी तो एंटीबायोटिक दवाएं चिकित्सक की निगरानी में सेवन करने की की जरूरत पड़ती है। इसके मुकाबले होम्योपैथिक में इसकी सटीक दवाएं हैं। साईंनाथ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. एसएम सिंह दावा करते हैं कि होम्योपैथिक दवाओं से इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी ओपीडी में इसके पांच से सात मरीज पहुंच रहे हैं। आयुवेदाचार्य डॉ. एसके राय कहते हैं कि आयुर्वेद में इस बीमारी का पूरा उपचार है।

‘बीमारी के लक्षण नजर आते ही तुरंत डॉक्टर को दिखाने की जरूरत है। नहीं तो बीमारी से लंग्स इंफेक्शन हो सकता है। आंखों  की रोशनी कमजोर हो सकती है। ब्रेन की क्षमता पर असर पड़ सकता है।’  डॉ. शक्ति बसु, त्वचा रोग विशेषज्ञ, बेली अस्पताल

बचाव के उपाय- संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखें- ताजा खाना खाएं और पौष्टिक आहार लें- खाना खाने के आधे घंटे पहले आधा ग्लास पानी खूब पीएं  - मौसमी फलों का सेवन करें- नीम के दांतून का इस्तेमाल करना फायदेमंद होगा- फ्रीज में रखे आटे की रोटियां न बनाएं- चंदन युक्त साबुन का इस्तेमाल करें- ज्यादा तली-भुनी चीजों से दूरी बनाएं- शाम को खाना जल्दी खाएं
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